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Hidma Profile : जंगलों का ‘लाल शैतान’ खत्म! 16 साल की उम्र में बना नक्सली, 27 बड़े हमलों का मास्टरमाइंड, ऐसा था खूंखार हिडमा…

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Hidma Profile/रायपुर : एक बड़ी खबर के अनुसार, भारत के सबसे खूंखार और रणनीतिक नक्सली चेहरों में शामिल एक करोड़ के इनामी कमांडर माडवी हिडमा के मारे जाने की खबर ने देश की सुरक्षा एजेंसियों में राहत की लहर दौड़ा दी है। दरअसल हिडमा, जिसे जंगलों का “लाल शैतान” कहा जाता था, पिछले तीन दशकों से सुरक्षा बलों का सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ था।

कौन था हिडमा ? सिर्फ नाम से कांपते थे सुरक्षाबल
हिडमा सिर्फ एक नक्सली नहीं, बल्कि CPI (माओवादी) का सबसे खतरनाक ऑपरेशनल मास्टरमाइंड माना जाता था।

  • वह पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (PGLA) की बटालियन-1 का मुखिया था
  • DKSZ जोनल कमेटी का बेहद प्रभावशाली सदस्य
  • और आखिर में संगठन की 21 सदस्यीय सेंट्रल कमेटी तक पहुंच गया था

Hidma Profile उसकी रणनीतियों, खुफिया नेटवर्क और जंगलों की गहरी समझ ने उसे नक्सलियों का सबसे घातक कमांडर बना दिया था। इस बाबत सुरक्षा बलों के मुताबिक, हिडमा अपनी फुर्ती, जंगल में छिपने की कला और तेज़ निर्णय क्षमता के कारण कई बार घेराबंदी तोड़कर भागने में कामयाब रहा था।

16 साल की उम्र में बना नक्सली—जंगलों में ही सीखा पढ़ना, लड़ना और मारना
कहा जाता है हिडमा को नक्सली संगठन ने एक 16 वर्षीय दुबले-पतले लड़के के रूप में पुवार्ती गांव से चुना था।
यही पर उसकी जिंदगी ने एक हिंसक मोड़ लिया—

  • नक्सलियों के “एजुकेशन सिस्टम” में पढ़ना-लिखना सीखा
  • कल्चरल विंग में प्रचार और संगठन कौशल सीखा
  • और फिर महिला कमांडर सुजाता ने उसे हथियार, एम्बुश और गुरिल्ला वॉरफेयर की ट्रेनिंग दी

Hidma Profile जानकारी दें कि खुद सुजाता पर भी 1 करोड़ का इनाम था और वह “लेडी वीरप्पन” के नाम से कुख्यात थी। सुजाता बस्तर डिवीजन कमेटी की प्रभारी थी और सुकमा समेत कई इलाकों में बड़े नक्सली हमलों की साजिश में उसका नाम सामने आता रहा है। शुरुआती उम्र में ही उसने हिंसा का रास्ता पकड़ लिया था और देखते ही देखते वह बस्तर के जंगलों में उसी तरह खौफ का प्रतीक बन गई। सुजाता पर कई राज्यों में केस भी दर्ज थे और सुरक्षा एजेंसियां सालों से उसे तलाश रही थीं। यही नहीं, बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा के कई बड़े घटनाक्रमों में उसकी भूमिका रही है।

27 बड़े हमले—झीरम घाटी से बीजापुर तक, मौत की पूरी फाइल हिडमा के नाम
हिडमा का नाम किसी साधारण नक्सली फाइल में नहीं—बल्कि देश के सबसे रक्तरंजित हमलों की लिस्ट में दर्ज है।

उसके सबसे बड़े ऑपरेशन:

  • 2010 – ताड़मेटला हमला, 76 जवान शहीद
  • 2013 – झीरम घाटी हमला, कई कांग्रेस नेता मारे गए
  • 2017 – बुर्कापाल हमला, 24 जवान शहीद
  • 2021 – बीजापुर एम्बुश, 22 जवान शहीद

ये सभी हमले उस क्रूरता और योजना को दिखाते हैं, जो उसे नक्सलियों में “सबसे खतरनाक दिमाग” बनाती थी।

हिडमा की असली ताकत: जंगल
छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा पर बसे घने जंगल हिडमा का किला थे।
वह—

  • बिना मोबाइल
  • बिना किसी डिजिटल संपर्क
  • पूरी तरह जंगल-आधारित नेटवर्क
  • के सहारे सुरक्षा बलों को चकमा देता था।

Hidma Profile कहा जाता है कि वह 10–15 किलोमीटर तक बिना रुके दौड़ सकता था, रात में मूवमेंट करता था और एक ऑपरेशन को 3-4 दिन पहले से बिना किसी तकनीकी निशान छोड़े प्लान करता था।

हिडमा के मरने से नक्सली संगठन को सबसे बड़ा झटका?
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि हिडमा की मौत नक्सली नेटवर्क के लिए कमान्ड एंड कंट्रोल लेवल पर बड़ा नुकसान है।
वह सिर्फ एक कमांडर नहीं,

  • रणनीतिकार
  • रिक्रूटर
  • ऑपरेशन प्लानर
  • और बैटल ग्राउंड कोऑर्डिनेटर

सभी भूमिकाएँ निभाता था। उसकी जगह लेना नक्सलियों के लिए आसान नहीं होगा। हालाँकि खुद सुरक्षा बल और प्रशासन भी ऐसा नहीं चाहेगी।

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