Tuesday, September 22, 2026
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Singrauli Minister Controversy : सिंगरौली की हकीकत उजागर कर गईं प्रभारी मंत्री सम्पतिया उइके…देखें वीडियो

Singrauli Minister Controversy
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Singrauli Minister Controversy : सिंगरौली। मध्यप्रदेश की ऊर्जाधानी सिंगरौली एक बार फिर चर्चा में है — इस बार बिजली उत्पादन नहीं, बल्कि अव्यवस्था और यात्रा की बेबस कहानी को लेकर। दरअसल, जिले की प्रभारी मंत्री सम्पतिया उइके का हालिया सिंगरौली दौरा जिले की जमीनी सच्चाई को उजागर कर गया। मंत्री का यह दौरा किसी सरकारी निरीक्षण से अधिक एक संघर्ष भरी यात्रा साबित हुआ।

Singrauli Minister Controversy : पहले एयर टैक्सी से आने की योजना बनी, लेकिन उड़ान रद्द हो गई। इसके बाद वंदे भारत एक्सप्रेस से आने की तैयारी हुई, पर वह भी छूट गई। अंततः मंत्री को अगले दिन साधारण ट्रेन से सिंगरौली पहुंचना पड़ा। स्वयं मंत्री उइके ने कहा — “सिंगरौली पहुंचने में जितनी मुश्किल हुई, उतनी किसी पहाड़ी इलाके में भी नहीं होती।” यह बयान जिले की व्यवस्था पर करारा तंज है। सवाल उठता है — जब प्रभारी मंत्री ही यहां पहुंचने में संघर्ष कर रही हैं, तो आम नागरिक, मरीज या छात्र का क्या हाल होगा?

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पत्रकारों से मुलाक़ात पर विवाद — सीनियर पत्रकार को बाहर निकाला गया!
समीक्षा बैठक के दौरान जिला कलेक्टर कार्यालय में पत्रकारों को घंटों इंतजार करना पड़ा। सूत्रों के मुताबिक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री राधा सिंह ने पत्रकारों को प्रभारी मंत्री से मिलने की अनुमति नहीं दी। यहां तक कि एक वरिष्ठ पत्रकार को बाहर निकाल दिया गया। जब मीडिया ने सवाल उठाया तो मंत्री राधा सिंह ने कहा — “आजकल नए-नए पत्रकार आ जाते हैं।” यह बयान मौजूद पत्रकारों में आक्रोश का कारण बना।

जवाबों की छतरी बंद — सवालों की बारिश जारी
सिंगरौली पहुंचने के बाद प्रभारी मंत्री ने समीक्षा बैठक की, लेकिन जैसे ही पत्रकारों ने तीखे सवाल दागे — जवाबों की डोर ढीली पड़ गई। डीएमएफ फंड, नगर निगम, पीएचई, ट्रामा सेंटर, मॉडल रोड, कंपनियों की मनमानी — हर मुद्दे पर या तो मौन रहीं या गोलमोल जवाब दिए।

डीएमएफ फंड घोटाले और “चम्मच-जग” मामले पर पूछे गए सवाल पर मंत्रीजी मुस्कुराकर चुप रहीं। ट्रामा सेंटर की दुर्दशा पर जब सवाल हुआ — “मरीजों को दवा नहीं, डॉक्टर नहीं, बेड नहीं, जिम्मेदार कौन?” तो जवाब मिला — “स्थिति सुधारने के प्रयास जारी हैं।” लेकिन जनता अब “प्रयास” नहीं, “परिणाम” चाहती है।

मॉडल रोड या मॉडल मज़ाक?
माजन मोड़ से विंध्यनगर तक करोड़ों की लागत से बनी “मॉडल रोड” गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। जब गुणवत्ता पर सवाल हुआ तो मंत्री बोलीं — “कार्य की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी।”

नगर निगम के भ्रष्टाचार और अधूरे निर्माणों पर भी वही जवाब — “समीक्षा चल रही है।”
पीएचई विभाग और अधूरे प्लाज़ा निर्माण पर बोलीं — “मैं देखवाऊंगी।”
लेकिन जनता अब देखवाने नहीं, सुधारवाने की मांग कर रही है।

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कंपनियों की मनमानी और प्रशासन की चुप्पी
पत्रकारों ने सवाल उठाया कि मजदूरों के आवेदन महीनों तक लंबित रहते हैं, जबकि कंपनियों के आवेदन पर तत्काल कार्रवाई होती है। मंत्रीजी ने इस पर भी कोई स्पष्ट उत्तर नहीं दिया। ऐसा लग रहा था कि सिंगरौली में कंपनियां सिर्फ़ कोयला नहीं, नीतियां भी ‘खनन’ कर रही हैं।

अंत में मंत्रीजी का मौन — जो बहुत कुछ कह गया…
प्रभारी मंत्री सम्पतिया उइके का सिंगरौली दौरा एक सवाल छोड़ गया — क्या यह अनुभव उन्हें सिंगरौली की असली तस्वीर दिखा सका, या यह दौरा भी रिपोर्टों की फाइलों में बंद होकर रह जाएगा?
सिंगरौली आज भी देश को रोशनी देता है, लेकिन खुद विकास की अंधेरी सुरंग में फंसा हुआ है।

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