Sanjay Gandhi Hospital : संजय गांधी अस्पताल से ‘मोह भंग’: निजी नर्सिंग होम खड़ा होते ही चिकित्सकों के इस्तीफों की झड़ी

Sanjay Gandhi Hospital : रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा स्थित संजय गांधी अस्पताल में चिकित्सकों का ‘मोह भंग’ होता दिखाई दे रहा है। वर्षों तक अस्पताल के पद और प्रतिष्ठा का लाभ उठाने के बाद, अब निजी नर्सिंग होम स्थापित होते ही धरती के भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर्स अस्पताल को अलविदा कह रहे हैं। सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से शुरू हुआ इस्तीफों का यह दौर अब संजय गांधी अस्पताल के मुख्य विभागों तक पहुँच चुका है, जिसने चिकित्सकों के ‘यूज़ एंड थ्रो अवे’ वाले चेहरे को बेनकाब कर दिया है।

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यह सिलसिला एक पैटर्न में चल रहा है: पहले डॉक्टर्स जोर-आजमाइश कर संजय गांधी अस्पताल में पद हासिल करते हैं। इसके बाद वे सरकारी अस्पताल के नाम और संसाधनों का उपयोग कर अपनी निजी प्रैक्टिस को चमकाते हैं और क्षेत्र में नाम कमाते हैं। जब निजी प्रैक्टिस से पर्याप्त आय होने लगती है और खुद का नर्सिंग होम या क्लिनिक खड़ा हो जाता है, तो वे सरकारी सेवा को ‘बाय-बाय’ कह देते हैं। यह पटकथा अब संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्था की एक कड़वी सच्चाई बन गई है।

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ताजा मामला अस्पताल के अति महत्वपूर्ण गायनिक विभाग का है। यहां से हाल ही में एक के बाद एक तीन महिला चिकित्सकों ने अपना इस्तीफा अस्पताल प्रबंधन को सौंप दिया है। सबसे पहले डॉ. कल्पना यादव ने इस्तीफा दिया, जिसके बाद डॉ. सरिता सिंह और अंत में डॉ. पूजा गंगवार ने भी निजी कारणों का हवाला देते हुए अस्पताल को अलविदा कह दिया है। एक साथ तीन चिकित्सकों के इस्तीफे से अस्पताल प्रबंधन और स्टाफ के बीच हड़कंप की स्थिति है, और गायनिक विभाग में सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।

इस्तीफा देने वाली महिला चिकित्सकों में डॉ. पूजा गंगवार का नाम विशेष रूप से चर्चा में है, क्योंकि वह नेशनल हॉस्पिटल की संचालिका भी हैं। डॉ. गंगवार तब सुर्खियों में आई थीं जब अस्पताल प्रबंधन द्वारा उन्हें सीएम हेल्पलाइन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई थी। जिम्मेदारी मिलते ही उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर अस्पताल आना बंद कर दिया था। महीनों चले इस घमासान के दौरान राजनीतिक दखल के बाद मामले का पटाक्षेप हुआ था, और उसके कुछ ही दिन बाद उन्होंने अस्पताल को अपना इस्तीफा सौंप दिया।

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इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल अधीक्षक डॉ. राहुल मिश्रा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्वीकार किया कि निजी कारणों से गायनिक विभाग की दो महिला चिकित्सकों ने प्रबंधन को इस्तीफा दिए हैं (हालांकि इस्तीफे तीन हुए हैं)। डॉ. मिश्रा का कहना है कि प्रबंधन उनसे बात करने की कोशिश कर रहा है, ताकि उन्हें रोका जा सके। उन्होंने आश्वस्त किया है कि गायनिक विभाग में चिकित्सकों की कमी नहीं होने दी जाएगी और प्रबंधन इसके लिए पुख्ता कदम उठा रहा है।

सरकारी अस्पताल में प्रतिष्ठा अर्जित कर निजी व्यवसाय को स्थापित करने और फिर अचानक सरकारी सेवा को छोड़ने की यह प्रवृत्ति न केवल सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित कर रही है, बल्कि धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों की नैतिकता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है। प्रबंधन को अब चिकित्सकों को रोकने और विभाग में पर्याप्त स्टाफ बनाए रखने के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे, अन्यथा मरीज़ों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

डॉ. राहुल मिश्रा (अस्पताल अधीक्षक, संजय गांधी अस्पताल): “निजी कर्म से गायनिक विभाग की दो महिला चिकित्सकों द्वारा प्रबंधन को इस्तीफा दिए गए हैं। प्रबंधन उनसे बात करने की कोशिश कर रहा है। गायनिक विभाग में चिकित्सकों की कमी नहीं होने दी जाएगी। प्रबंधन इसके लिए पुख्ता कदम उठा रहा है।”

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