MP Farmers Crisis : सिंगरौली (मध्य प्रदेश) : धान कटाई के ठीक समय पर हुई बेमौसम भारी बारिश (अतिवृष्टि) ने सिंगरौली जिले के अन्नदाताओं के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी कर दी है। तिंगुड़ी समेत देवसर, चितरंगी, सरई, बैढन और माड़ा क्षेत्र के हजारों एकड़ खेतों में कटी और खड़ी दोनों तरह की धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों की महीनों की मेहनत और पूंजी बर्बाद हो गई है।
MP Farmers Crisis : फसलों को भारी नुकसान, किसानों में मायूसी
खेत बने तालाब: जहां कुछ दिन पहले तक खेतों में सुनहरी धान की बालियां लहलहा रही थीं, वहीं अब अतिवृष्टि के कारण पूरा इलाका पानी से भर गया है। धान के अलावा उड़द और मूंग जैसी अन्य फसलें भी पूरी तरह से डूब गई हैं।
सड़ने का खतरा: लगातार जलभराव की स्थिति बनी रहने से फसलों के सड़ने और उनमें कीट प्रकोप (Pest Attack) का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों की बची-खुची उम्मीदें भी टूट रही हैं।
पूंजी पर पानी फिरा: किसानों का कहना है कि बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी पर किया गया उनका पूरा खर्च अब डूब चुका है। उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया है और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
जनप्रतिनिधियों ने उठाई किसानों की आवाज़, कलेक्टर को लिखा पत्र
किसानों की इस गंभीर पीड़ा को देखते हुए स्थानीय विधायक रामनिवास शाह (सिंगरौली) और राजेंद्र मेश्राम (देवसर) ने तुरंत सक्रियता दिखाई है। दोनों विधायकों ने कलेक्टर, सिंगरौली को पत्र लिखकर जिला प्रशासन से तत्काल राहत कार्य शुरू करने की मांग की है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का शीघ्र सर्वे करवाने और किसानों को मुआवज़ा राशि जल्द से जल्द उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।
प्रशासन की तैयारी: सर्वे के बाद मिलेगी राहत
सूत्रों के हवाले से खबर है कि जिला प्रशासन ने इस प्राकृतिक आपदा का संज्ञान ले लिया है। कृषि और राजस्व विभाग की टीमों को तत्काल प्रभाव से अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों के निरीक्षण और सर्वे रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट तैयार होते ही इसे शासन को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर प्रभावित किसानों को मुआवज़ा वितरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। ग्रामीणों ने शासन से जल्द से जल्द सर्वे पूरा कर मुआवज़े













