Saturday, August 15, 2026
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Devuthani Ekadashi 2025 : नोट कर लें श्रीहरि पूजन का शुभ मुहूर्त, इस विधि से करें भगवान विष्णु को प्रसन्न

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Devuthani Ekadashi 2025 : नई दिल्ली। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहा जाता है। इसे देव प्रबोधिनी एकादशी और देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह व्रत 1 नवंबर (शनिवार) को रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागकर सृष्टि के संचालन की जिम्मेदारी पुनः संभालते हैं।

Devuthani Ekadashi 2025 :  देवउठनी एकादशी 2025 तिथि और पारण

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर, सुबह 9:11 बजे

  • एकादशी तिथि समाप्त: 2 नवंबर, सुबह 7:31 बजे

  • पारण (व्रत तोड़ने का) मुहूर्त: 2 नवंबर, दोपहर 1:11 से 3:23 बजे तक

Devuthani Ekadashi 2025 : देवउठनी एकादशी 2025 पूजन मुहूर्त

  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से 12:27 बजे तक (सबसे शुभ समय)

  • गोधूली मुहूर्त: शाम 5:36 से 6:02 बजे तक

  • प्रदोष काल: शाम 5:36 बजे से आगे

पूजन विधि

इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और घर के द्वार पर जल छिड़ककर स्वच्छता करें। चूना या गेरू से अल्पना बनाएं और गन्ने का मंडप तैयार करें।

भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित कर निम्न वस्तुओं से पूजन करें :
गुड़, रुई, रोली, अक्षत, पुष्प, चावल, दीपक।

पूजन के दौरान यह मंत्र बोलें —
“उठो देव, बैठो देव, तुम्हारे उठने से सब शुभ कार्य हों।”

देवउठनी एकादशी पर इन गलतियों से बचें

  1. तामसिक भोजन और मदिरा का सेवन न करें।

  2. भगवान विष्णु को जगाने से पहले उनकी पूजा प्रारंभ न करें।

  3. इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ें, क्योंकि इसी दिन तुलसी और शालिग्राम का विवाह होता है।

  4. देर तक न सोएं — ब्रह्म मुहूर्त में उठकर श्रीहरि का नाम जपें और जागरण करें।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, देवउठनी एकादशी के दिन से ही चातुर्मास का समापन होता है और विवाह, गृहप्रवेश, भूमि पूजन जैसे मांगलिक कार्यों की शुरुआत की जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी की आराधना से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि प्राप्त होती है।

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