krtrim baarish : नई दिल्ली : दिल्ली की जहरीली हवा और बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए एक नई पहल शुरू की जा रही है। दिल्ली सरकार, IIT कानपुर और मौसम विभाग (IMD) मिलकर क्लाउड सीडिंग तकनीक के जरिए शहर में कृत्रिम बारिश कराने जा रहे हैं। इस तकनीक में सेसना विमान के पंखों के नीचे 8-10 केमिकल पैकेट लगाए जाएंगे, जिनमें सिल्वर आयोडाइड, पोटैशियम आयोडाइड और ड्राई आइस जैसे रसायन होंगे। पायलट एक बटन दबाकर इन पैकेट्स को ब्लास्ट करेगा, जिससे ये रसायन बादलों में फैलेंगे और बारिश कर प्रदूषण को कम करेंगे।
क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया में नम बादलों में इन रसायनों को मिलाकर पानी की बूंदों को भारी बनाया जाता है, जिससे वे बारिश के रूप में गिरती हैं। इस तकनीक से दिल्ली के प्रदूषित इलाकों में खासतौर पर उत्तर-पश्चिम दिल्ली पर फोकस किया जाएगा। हर उड़ान लगभग 90 मिनट की होगी और करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करेगी। इस प्रक्रिया से हवा में मौजूद PM2.5 जैसे जहरीले कण 20-30 प्रतिशत तक कम हो सकते हैं, जिससे शहर की हवा की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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krtrim baarish दिल्ली की हवा का गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर 300 से 400 के बीच पहुंच जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता है। क्लाउड सीडिंग के जरिए इसे 100-200 तक लाया जा सकता है, जिससे सांस लेने वालों को बड़ी राहत मिलेगी। यह तकनीक पहले बेंगलुरू, चीन और यूएई जैसे देशों में सफलतापूर्वक इस्तेमाल हो चुकी है। खासकर चीन ने 2008 के ओलंपिक के दौरान इस तकनीक से 40 प्रतिशत प्रदूषण कम किया था।
दिल्ली में इस प्रोजेक्ट की कुल लागत ₹3.21 करोड़ है, जिसे IIT कानपुर, IMD और दिल्ली सरकार ने मिलकर शुरू किया है। अगले तीन दिनों में कानपुर से मेरठ पहुंचे विशेष विमान इस तकनीक को आजमाएंगे और प्रदूषण कम करने के लिए पहली बार इस नए प्रयोग को लागू करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रयास दिल्लीवासियों के लिए प्रदूषण के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
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krtrim baarish हालांकि क्लाउड सीडिंग की प्रक्रिया हल्की बारिश ही लाएगी, लेकिन इससे हवा साफ होगी और प्रदूषित कण धो दिए जाएंगे। इस प्रकार की कृत्रिम बारिश से पूरे शहर को भिगोने की बजाय सिर्फ प्रदूषित इलाकों पर फोकस किया जाएगा। इस कदम से दिल्ली में प्रदूषण की गंभीर समस्या पर एक तकनीकी और वैज्ञानिक समाधान मिल सकेगा।









