Tuesday, August 25, 2026
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MP News : बरगी नगर: मनकेड़ी में आज भी कायम है तीज त्योहार की पारंपरिक महक, भाई दूज पर डेढ़ सौ वर्षों से हो रहा चंडी मेले का आयोजन

शुभम अवधिया, बरगी नगर। इंस्टाग्राम, फेसबुक और सोशल मीडिया के इस भाग-दौड़ भरे दौर में भी बरगी विकासखंड के मनकेड़ी ग्राम ने अपनी पारंपरिक तीज-त्योहारों की महक को आज भी बरकरार रखा है। इस ग्राम की सबसे अनूठी पहचान है, भाई दूज के अवसर पर डेढ़ सौ वर्षों से भी अधिक समय से आयोजित होने वाला ‘चंडी मेला’। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत उदाहरण है। वयोवृद्ध ग्रामीणों के अनुसार, इस प्रथा की शुरुआत ग्राम के स्वर्गीय खुदा बख्श ने की थी, जिसे बाद में उनके वंशज स्वर्गीय कल्लू मालगुजार और स्वर्गीय अहमद मालगुजार ने निभाया। वर्तमान में ग्राम प्रमुख हफ़ीज मालगुजार और उनके पुत्र परवेज़ मालगुजार इस गौरवशाली परंपरा को पूरी शिद्दत से आगे बढ़ा रहे हैं।

चंडी मेले का आयोजन एक विशिष्ट पारंपरिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। ग्राम के बुजुर्ग डुमारी झरिया, दिमाग कोकडे और रामाधार आदिवासी बताते हैं कि दीपावली के पूर्व, मालगुजार परिवार द्वारा लगभग दर्जन भर आसपास के ग्रामों (जैसे रीमा, टेमर, चौरई, सहजपुरी, हरदुली, बिजोरा, गागन्दा आदि) में पारंपरिक हल्दी-चावल और सुपारी भेजकर मेले का आमंत्रण न्योता भेजा जाता है। इन सभी ग्रामों में स्थानीय ग्राम पटेल और कोटवार द्वारा मुनादी कराई जाती है। इसके बाद, इन ग्रामों की स्थानीय ग्वाल टोलियाँ और व्यापारी बंधु विशेष रूप से इस चंडी मेले में शामिल होने के लिए मनकेड़ी आते हैं।

मेला शुरू होने के दिन, ग्वाल वंश के प्रमुख कढोरी यादव और प्यारेलाल यादव के नेतृत्व में मनकेड़ी की स्थानीय ग्वालटोली सबसे पहले ग्राम प्रमुख हफ़ीज़ मालगुजार के घर पहुँचती है और पूरे मालगुजार परिवार को सम्मानपूर्वक अपने साथ चंडी मेला स्थल तक लिवाकर लाती है। मेला स्थल पर मृदंग की थाप और बांसुरी की धुन पर नाचते-गाते यदुवंशी चंडी माता की विधि-विधान से पूजा अर्चना करते हैं और चंडी माता को ब्याहने की पारंपरिक प्रक्रिया पूरी की जाती है। तत्पश्चात, मालगुजार परिवार द्वारा मंच पर बैठे सभी दूर-दराज से आए ग्वालटोलियों और अतिथियों का पान खिलाकर भव्य स्वागत किया जाता है।

मनकेड़ी का यह चंडी मेला सामाजिक सद्भाव का एक अनूठा उदाहरण है। यह उल्लेखनीय है कि मालगुजार का यह मुस्लिम परिवार पिछले डेढ़ सौ वर्षों से भी अधिक समय से सनातन धर्म के तीज-त्योहारों को पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाता आ रहा है। दीपावली, दशहरा, होली, रक्षाबंधन और नवरात्र जैसे सभी पर्वों को यह परिवार पूरे गांव के साथ मिलकर मनाता है, जिससे गांव में अद्भुत धार्मिक सौहार्द का वातावरण बना रहता है। प्रत्येक ग्वाल टोली को मनमोहक नृत्य प्रस्तुत करने पर मालगुजार परिवार द्वारा बख्शीश स्वरूप पुरस्कार भी दिया जाता है।

मनकेड़ी गाँव की यह अनूठी परंपरा न केवल धर्मनिरपेक्षता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि यह नई पीढ़ियों के लिए भी एक प्रेरणास्रोत बन गई है। यह स्पष्ट संदेश देती है कि भारतीय संस्कृति की शक्ति उसकी विविधता और आपसी सम्मान में निहित है। इस अवसर को सफल बनाने में ग्राम के अजय नेताम, रवि राज तिवारी, संतलाल झारिया, सुरेश गोंड़, रामाधार गोंड़, भैया लाल, अमर लाल, नंदलाल गोंड़, राजकुमार वंशकार सहित समस्त ग्रामवासियों का विशेष सहयोग रहता है।

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