Friday, August 14, 2026
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Singrauli : land acquisition scam : करोड़ों का वनभूमि व्यापार, अफसर और माफिया की मिलीभगत से जंगलराज

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land acquisition scam : सिंगरौली। कोयले और ऊर्जा की राजधानी कही जाने वाली सिंगरौली अब भ्रष्टाचार के जंगलराज की मिसाल बनती जा रही है। जिले के जंगलों में वह दीमक लग चुकी है जो हरियाली नहीं, बल्कि लूट बो रही है। हैरत की बात यह है कि करीब 80 हज़ार हेक्टेयर वन भूमि का रिकॉर्ड ही रहस्यमय ढंग से गायब है। न नक्शा, न खसरा, न खाता, न खतौनी — और इसी ग़ायबगीरी के खेल में अफसरों और भू-माफियाओं के गठजोड़ ने सरकारी खज़ाने को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है।

1988 में जब सिंगरौली (तब सीधी जिले का हिस्सा) के 77 गांवों की लगभग 92 हज़ार हेक्टेयर भूमि वन विभाग को सौंपी गई थी, तब किसी ने नहीं सोचा था कि कभी खुद विभाग के पास अपनी ही जमीन का रिकॉर्ड नहीं बचेगा। आज स्थिति यह है कि वन विभाग के पास सिर्फ 16 गांवों की भूमि का ही दस्तावेज़ मौजूद है, जबकि बाकी 61 गांवों की करीब 80 हज़ार हेक्टेयर भूमि बिना नक्शे और बिना खसरे के “अदृश्य” हो चुकी है।

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land acquisition scam : इस पूरे मामले में मुआवज़े के नाम पर भी बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रिलायंस कंपनी के पूर्व अधिकारी के.के. त्रिपाठी ने जुलाई 2024 में मुख्य सचिव को शिकायत भेजी थी। उनका आरोप था कि राजस्व अफसरों ने अपने रिश्तेदारों और प्रभावशाली लोगों के नाम पर सरकारी जमीन दर्ज कराई और बाद में अधिग्रहण दिखाकर करोड़ों रुपये का मुआवज़ा वसूल लिया गया। त्रिपाठी ने सभी दस्तावेज़ों के साथ पुनः शिकायत भी भेजी, लेकिन फाइल आज भी सरकारी सिस्टम की अलमारियों में धूल खा रही है।

बंधा कोल ब्लॉक क्षेत्र में भी इस भ्रष्टाचार की परतें खुल रही हैं। चार गांवों की करीब 800 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण के दायरे में है, लेकिन जांच में पाया गया कि इनमें से 500 हेक्टेयर भूमि पर कभी कोई वन व्यवस्थापन हुआ ही नहीं। शेष भूमि 1958 से 1985 के रिकॉर्ड में सरकारी दर्ज थी, जो बाद के वर्षों में किसी तरह निजी बताई जाने लगी। सवाल यह है कि सरकारी भूमि रिकॉर्ड में निजी कैसे बन गई — यह केवल लापरवाही थी या योजनाबद्ध साजिश?

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सिंगरौली के डीएफओ अखिल बंसल ने स्वयं कलेक्टर को पत्र लिखकर स्वीकार किया है कि विभाग के पास 61 गांवों की सीमाएं स्पष्ट नहीं हैं और 1988 के बाद से वन व्यवस्थापन नहीं हुआ। यानी विभाग खुद मान रहा है कि उसकी ही जमीन अब कागज़ों से बेदखल हो चुकी है। डिजिटल इंडिया के दौर में जब भूमि अभिलेखों को ऑनलाइन करने की बात हो रही है, तब सिंगरौली की यह स्थिति व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना बनकर सामने आई है।

अब देखना यह है कि नवागत कलेक्टर गौरव बैनल इस महाघोटाले की तह तक पहुंच पाते हैं या नहीं। यह मामला न केवल उनकी प्रशासनिक समझ की परीक्षा है बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उनकी पहली बड़ी अग्निपरीक्षा भी है। सिंगरौली के लोग अब यही पूछ रहे हैं — क्या जंगलों और सरकारी संपत्तियों में लगी यह दीमक कभी रुकेगी, या फिर हर हरियाली और ईमानदारी इसी तरह कागज़ों में दफन होती रहेगी?

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VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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