Sunday, August 16, 2026
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Balod News : डिजिटल सिग्नेचर घोटाला : हिमांशु मिश्रा और अनुराग त्रिवेदी की घिनौनी करतूत!, बालोद प्रशासन बना भ्रष्टाचार का दलाल!

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Balod News
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Balod News : बालोद : छत्तीसगढ़ में बालोद जिला के निवासी सामाजिक कार्यकर्ता मोहन निषाद ने कहा कि जिले का नाम आज शर्म से झुक गया है, वजह है डिजिटल सिग्नेचर घोटाला। इस गंदे खेल का मास्टरमाइंड है हिमांशु मिश्रा, जिसकी चालाकी, घटियापन और लूटखोरी ने जिले की शिक्षा व्यवस्था को गटर में फेंक दिया। साथ ही तत्कालीन अधिकारी अनुराग त्रिवेदी ने भी इस लूट के खेल में मुँह में चुप्पी की गांठ बाँधकर खुला समर्थन दिया था। प्रशासन की मिलीभगत से यह पूरा खेल अब जिले की जनता को चिढ़ा रहा है।शिकायतों के मुताबिक, ब्लॉक समन्वयकों ने शिक्षकों और शाला प्रमुखों को धमका-धमकाकर प्रति स्कूल ₹3000 वसूले। कुल 1,580 शालाओं से करीब ₹47 लाख की सीधी लूट की गई।

 

Balod News : सोचिए, जिन स्कूलों में बच्चों के पास बैठने तक की कुर्सी नहीं है, वहाँ इन निकम्मों ने बेकार की पेनड्राइव थमा दी। चार साल में इन तथाकथित डिजिटल सिग्नेचर का कहीं इस्तेमाल तक नहीं हुआ। यानी जो दिया गया, वह महज़ कचरा है, और जो लिया गया, वह लूट की मोटी रकम।सबसे घटिया हरकत यह रही कि कंपनी ने पावती तक फर्जी दी। न स्कूल का नाम, न तारीख, सिर्फ एक कोरा कागज। यह हरकतें सीधे-सीधे आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 409 (लोकसेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात), 467/468 (जालसाजी), और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाती हैं।हिमांशु मिश्रा की गंदी मानसिकता और पैसा हड़पने की भूख ने पूरे जिले का नाम बदनाम कर दिया।

 

Balod News : यह आदमी शिक्षा विभाग के नाम पर कलंक है, जिसका असली चेहरा अब जनता के सामने बेनकाब हो चुका है। दूसरी ओर, अनुराग त्रिवेदी जैसे अफसर जनता को मूर्ख बनाकर कह रहे हैं कि “यह आदेश शासन का था।” अरे शासन का आदेश था ही नहीं, तो फिर यह बेहूदगी किसके कहने पर हुई? क्या त्रिवेदी भी इस लूट के हिस्सेदार नहीं हैं?

 

 

Balod News : बालोद प्रशासन की चुप्पी बताती है कि यहाँ अफसर जनता के सेवक नहीं, बल्कि भ्रष्टाचारियों के दलाल बन चुके हैं। जनता के टैक्स से मिलने वाला पैसा इन लुटेरों की जेब में जा रहा है और अधिकारी तमाशबीन बनकर देख रहे हैं।अब सवाल जनता का है – क्या हिमांशु मिश्रा और अनुराग त्रिवेदी जैसे घटिया दिमाग वाले भ्रष्टाचारी जेल की हवा खाएँगे या प्रशासन इनकी दलाली करता रहेगा? अगर इस बार कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो बालोद प्रशासन पर “भ्रष्टाचार का गोदाम” होने का ठप्पा हमेशा के लिए लग जाएगा।

 

 

 

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