Sunday, August 16, 2026
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Nepal’s politics : नेपाल की राजनीति फिर संकट में-17 साल में 14 बार बदली सरकार, ‘Gen Z आंदोलन’ ने बढ़ाया असंतोष

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काठमांडू, 09 सितंबर 2025 : नेपाल एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता की आग में झुलस रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ भड़के ‘Gen Z आंदोलन’ ने सत्ता की बुनियाद को हिला दिया है। संसद भवन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक प्रदर्शनकारियों ने घेराव किया और राजधानी काठमांडू हिंसक विरोध का केंद्र बन गई। इसी बीच प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दे दिया है।

2008 में राजतंत्र खत्म होने के बाद नेपाल में लोकतंत्र की शुरुआत हुई। उम्मीद थी कि देश स्थिरता की ओर बढ़ेगा, मगर हकीकत इसके उलट रही। पिछले 17 सालों में नेपाल ने 14 प्रधानमंत्री बदलते देखे हैं। औसतन हर 14-15 महीने में एक नया प्रधानमंत्री पद पर आया और सत्ता संघर्ष, दल-बदल व गठबंधन की राजनीति ने किसी को भी स्थायित्व नहीं दिया।

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माओवादी नेता प्रचंड हों, शेर बहादुर देउबा हों या फिर खुद ओली — हर नेता ने कई बार सत्ता संभाली और खोई। कभी आंतरिक खींचतान, कभी संवैधानिक विवाद और कभी जनता के गुस्से ने सरकारों को गिरा दिया।

क्यों नहीं थम रही अस्थिरता?

  • गठबंधन राजनीति: कोई भी दल स्पष्ट बहुमत नहीं ला सका, नतीजतन सरकारें समझौतों और अविश्वास पर टिकी रहीं।
  • व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा: बड़े नेता कई बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन स्थिरता लाने में नाकाम रहे।
  • संवैधानिक पेच: 2015 का नया संविधान कई सवाल अनसुलझा छोड़ गया, जिसके चलते राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अधिकारों पर विवाद बार-बार हुआ।
  • बाहरी दबाव: भारत और चीन के बीच संतुलन साधने की कोशिशों ने भी राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ाया।

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राजतंत्र से गणराज्य तक का सफर

नेपाल का राजनीतिक इतिहास अस्थिरता से भरा रहा है। 1846 में राणा शासन शुरू हुआ और 1951 तक चला। 1990 में जनआंदोलन के बाद बहुदलीय लोकतंत्र और संवैधानिक राजतंत्र की शुरुआत हुई। 2006 के दूसरे जनआंदोलन ने राजतंत्र का अंत किया और 2008 में नेपाल गणराज्य बना। लेकिन लोकतांत्रिक ढांचे के बावजूद राजनीतिक स्थिरता अब तक सपना ही बनी हुई है।

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आज का संकट और कल के सवाल

ओली सरकार के सोशल मीडिया बैन के बाद भड़के प्रदर्शनों ने पूरे देश को हिला दिया है। राष्ट्रपति आवास और संसद तक भीड़ पहुंच गई। नेताओं के घरों में आगजनी हुई और प्रधानमंत्री समेत कई मंत्रियों ने पद छोड़ दिया। सवाल यह है कि क्या अब नेपाल को एक स्थिर राजनीतिक राह मिलेगी या फिर हर 14 महीने में बदलने वाले प्रधानमंत्रियों का यह सिलसिला जारी रहेगा।

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VIKASH KHALKHO
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।

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