Monday, September 28, 2026
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CG News : गढ़ कलेवा : छत्तीसगढ़ी स्वाद और महिला सशक्तिकरण की अद्भुत पहल

रिपोर्ट: के. पी. चंद्राकर/बालोद : छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में नगर पालिका प्रशासन और महिला स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से एक ऐसी पहल शुरू हुई है, जो पारंपरिक खानपान को संजोने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग भी प्रशस्त कर रही है। नगर पालिका परिषद परिसर में संचालित “गढ़ कलेवा” इस सहभागिता का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

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यहाँ छत्तीसगढ़ी व्यंजनों की सुगंध और घर जैसे स्वाद का अनूठा अनुभव मिलता है। पूर्णिमा सोनी और उनकी टीम ने इस प्रयास से न केवल स्वादिष्ट पकवान परोसकर लोगों का मन जीता है, बल्कि आजीविका और आत्मनिर्भरता की नई पहचान भी गढ़ी है। यह पहल केवल कमाई तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक प्रगति का प्रतीक बन चुकी है, जिसने कई परिवारों के जीवन को सहारा दिया है।

छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजन और संस्कृति

बालोद शहर के हृदयस्थल में स्थित गढ़ कलेवा छत्तीसगढ़ी खानपान की असल झलक प्रस्तुत करता है। यहाँ परोसी जाने वाली ठेठरी, खुरमी, अरसा, गुलगुल भजिया, कुशली और गुजिया जैसे पकवान स्थानीय परंपरा और संस्कृति की महक से भरपूर हैं। ये व्यंजन आम जनमानस को लुभाते हैं और बाहर से आने वाले अतिथियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। पीढ़ियों से हस्तांतरित यह पाक-कला भूख मिटाने के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर का परिचय भी कराती है।

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महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता

गढ़ कलेवा का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जाता है, जिनमें पूर्णिमा सोनी का समूह प्रमुख है। इन महिलाओं ने अपने हुनर और परिश्रम से स्वादिष्ट भोजन तैयार कर आर्थिक स्वतंत्रता की ओर कदम बढ़ाए हैं। नगर पालिका से उन्हें आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण और मंच मिला, जिसका उन्होंने सार्थक उपयोग किया।

पूर्णिमा सोनी और उनकी सहकर्मियों ने इसे केवल व्यवसाय के रूप में नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बनाया। उनके प्रयासों ने अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है कि वे अपने कौशल को पहचानें और स्वावलंबी बनें।

परंपरा और आधुनिकता का संगम

छत्तीसगढ़ का भोजन उसकी पहचान और परंपराओं से जुड़ा है। ठेठरी, खुरमी, अरसा और कुशली जैसे व्यंजन त्योहारों और ग्रामीण जीवन के अभिन्न हिस्से हैं। गढ़ कलेवा इन परंपरागत व्यंजनों को आधुनिक दौर में जीवित रखने का माध्यम बन गया है, जिससे नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ सके।

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रोज़गार और सामाजिक उत्थान

गढ़ कलेवा केवल खानपान का केंद्र नहीं, बल्कि कई घरों के लिए रोज़गार का साधन भी है। पहले जो महिलाएं केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, अब वे इस पहल से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। पूर्णिमा सोनी की अगुवाई में ये महिलाएं अपने परिवार की ज़िम्मेदारियों को निभाने के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव भी ला रही हैं।

प्रशासन और समाज की साझेदारी

गढ़ कलेवा की सफलता में नगरीय निकाय प्रशासन की भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। प्रशासन ने न केवल स्थान उपलब्ध कराया, बल्कि प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और विपणन की सुविधा भी दी। यह साझेदारी दर्शाती है कि शासन और समाज मिलकर विकास और सशक्तिकरण की नई दिशा तय कर सकते हैं।

गढ़ कलेवा सिर्फ भोजन परोसने का स्थान नहीं, बल्कि सामाजिक उत्थान का प्रतीक है। यहाँ काम कर रही महिलाएं अब न केवल आर्थिक रूप से मज़बूत हुई हैं, बल्कि समाज में उनकी स्थिति भी सुदृढ़ हुई है। आने वाले समय में इस तरह की पहल अन्य जिलों में भी अपनाई जा सकती है, जिससे अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनें और पारंपरिक संस्कृति को बढ़ावा मिले।

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गढ़ कलेवा और पूर्णिमा सोनी की पहल छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की बात है। यह न केवल स्थानीय भोजन को जीवित रख रहा है, बल्कि महिलाओं को सशक्त करने और समाज में बदलाव लाने का साधन भी है। प्रशासन और महिला समूहों की यह साझेदारी साबित करती है कि संस्कृति और स्वावलंबन साथ-साथ चल सकते हैं। गढ़ कलेवा सिर्फ स्वाद का केंद्र नहीं, बल्कि मेहनत, आत्मविश्वास और उम्मीद का प्रतीक है, जो छत्तीसगढ़ की असली आत्मा को उजागर करता है।

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