Tuesday, October 6, 2026
Home National राष्ट्रपति संदर्भ मामले में केंद्र का तर्क : राज्य सरकारों के पास...

राष्ट्रपति संदर्भ मामले में केंद्र का तर्क : राज्य सरकारों के पास मौलिक अधिकार नहीं, रिट याचिका अमान्य

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रपति के संदर्भ की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र की ओर से कहा कि राज्य सरकारें अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर नहीं कर सकतीं, क्योंकि उनके पास मौलिक अधिकार नहीं हैं। उन्होंने तर्क दिया कि मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए लागू अनुच्छेद 32 केवल व्यक्तियों या संस्थाओं के लिए है, राज्य सरकार के लिए नहीं।

Read News : सब्जी में छिपकली मिलने से फूड पॉइजनिंग, एक ही परिवार के 5 लोग अस्पताल में भर्ती

एसजी ने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के बीच विवादों का निपटारा अनुच्छेद 131 के तहत होना चाहिए। राज्य सरकार यह दावा करके भी रिट याचिका नहीं दायर कर सकती कि वह जनता के अधिकारों की संरक्षक है।

राज्यपाल के खिलाफ रिट याचिका:
तुषार मेहता ने कहा कि राज्यपाल के खिलाफ अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। राज्यपाल राज्य सरकार के मंत्रिमंडल की सलाह पर काम करते हैं और राष्ट्रपति के आदेश पर नियुक्त होते हैं। इसलिए उनके खिलाफ ‘Writ of Mandamus’ की मांग नहीं की जा सकती।

Read News : ट्रंप टैरिफ से बाजार में हलचल – गिरावट के बाद रिकवरी मोड में सेंसेक्स-निफ्टी

आंध्र प्रदेश सरकार का रुख:
आंध्र प्रदेश सरकार की पैरवी कर रहे सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि वे राज्य से निर्देश लेकर ही इस मामले में दलील पेश करेंगे। उनकी सरकार ने अनुच्छेद 32 के तहत कई याचिकाएं पहले ही दायर की हैं, जो लंबित हैं।

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई अब केंद्र और विभिन्न राज्यों की दलीलों के आधार पर आगे बढ़ेगी।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here