Jammu and Kashmir : जम्मू-कश्मीर: नर्स सरला भट्ट का दर्दनाक अंत — हॉस्टल से अगवा, 4 दिन तक दरिंदगी, फिर श्रीनगर में मिली क्षत-विक्षत लाश

Sanjay Sahu
CG CRIME

Jammu and Kashmir : नई दिल्ली: 35 साल पुराने कश्मीरी पंडित सरला भट्ट हत्या कांड में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) के पूर्व प्रमुख यासीन मलिक के आवास समेत कई ठिकानों पर छापेमारी की है। यह मामला उस दौर का है जब कश्मीर आतंकवाद और अलगाववाद की चपेट में था, और कश्मीरी हिंदुओं को वादी छोड़ने के लिए लगातार धमकियां दी जा रही थीं।

Jammu and Kashmir : सरला भट्ट, अनंतनाग की रहने वाली और कश्मीरी पंडित परिवार में जन्मी, पेशे से नर्स थीं। श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (SKIMS) में कार्यरत सरला अपनी कोमल मुस्कान और मरीजों के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती थीं। लेकिन 1990 का दौर बदल चुका था — पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद ने कश्मीरियत की पहचान को गहरी चोट पहुंचाई थी। मस्जिदों से घोषणाएं और घरों के बाहर पोस्टर चिपकाकर हिंदुओं को चेतावनी दी जाती थी — “रालिव, गालिव या चालिव” यानी धर्म परिवर्तन करो, भाग जाओ या मौत के लिए तैयार रहो।

Jammu and Kashmir : इसी माहौल में, 14 अप्रैल 1990 को, JKLF के आतंकियों ने सरला भट्ट को उनके अस्पताल के छात्रावास से अगवा कर लिया। आरोप था कि वह पुलिस की मुखबिर हैं। आतंकियों ने उन्हें अज्ञात स्थान पर ले जाकर चार दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया और फिर बर्बर तरीके से टुकड़े-टुकड़े कर उनकी हत्या कर दी।

Jammu and Kashmir : 19 अप्रैल को श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके में सरला का क्षत-विक्षत शव मिला — गोलियों के निशान, गहरे घाव और पास ही रखा एक नोट, जिसमें उन्हें ‘पुलिस मुखबिर’ बताया गया था। अंतिम संस्कार के दौरान भी आतंकियों ने उनके परिजनों पर बम से हमला किया और अनंतनाग स्थित घर को जला दिया। टूट चुके परिवार ने आखिरकार अपनी जन्मभूमि छोड़ दी। तब से लेकर आज तक, सरला भट्ट के परिजन न्याय की राह देख रहे हैं।

Jammu and Kashmir : 12 अगस्त को हुई ताजा कार्रवाई में, एजेंसियों ने JKLF से जुड़े कई लोगों के घरों की तलाशी ली, जिनमें संगठन के पूर्व नेता पीर नूरुल हक शाह उर्फ ‘एयर मार्शल’ का आवास भी शामिल है। अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला हाल ही में एजेंसी को सौंपा गया है और जांच तेज की गई है।

Jammu and Kashmir : गौरतलब है, सरला भट्ट की हत्या से कुछ दिन पहले ही हब्बा कदल की टेलीफोन ऑपरेटर गिरिजा टिक्कू के साथ भी इसी तरह की क्रूरता हुई थी — आतंकियों ने उनका सामूहिक बलात्कार करने के बाद लकड़ी काटने की मशीन से जिंदा काट दिया था। यह दो घटनाएं 1990 के उस काले दौर की गवाही देती हैं, जब कश्मीरी पंडित समुदाय पर आतंक का साया सबसे गहरा था, और न्याय की उम्मीद अब भी अधूरी है।

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