भारतीय शेयर बाजार में भूचाल : सेंसेक्स-निफ्टी औंधे मुंह गिरे, निवेशकों में हड़कंप…

Parivesh
भारतीय शेयर बाजार में भूचाल

भारतीय शेयर बाजार : मुंबई। भारतीय शेयर बाजार गुरुवार की सुबह जब खुला, तो निवेशकों के चेहरे पर तनाव साफ झलक रहा था। शुरुआती घंटे में ही सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा लुढ़क गया और निफ्टी भी 130 अंकों की गिरावट के साथ फिसल गया। बाजार में यह भगदड़ मचाई अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस ऐलान ने, जिसमें उन्होंने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी।

भारतीय शेयर बाजार : ट्रंप के टैरिफ का सीधा असर, बाजार में मची बिकवाली की होड़
ट्रंप के फैसले के बाद निवेशकों ने घबराहट में तेजी से मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसका असर यह हुआ कि सेंसेक्स 434 अंक टूटकर 81,047 पर और निफ्टी 134 अंक गिरकर 24,720 पर आ गया। ब्लूचिप कंपनियों के शेयर भी इस बिकवाली से नहीं बच सके। टाटा मोटर्स, रिलायंस, महिंद्रा, एयरटेल जैसे दिग्गज 1% से ज्यादा टूट गए। हालांकि, टाटा स्टील, जोमैटो और HUL जैसे कुछ शेयरों ने थोड़ी मजबूती जरूर दिखाई।

निफ्टी में 50 में से 42 शेयर लाल निशान में
निफ्टी में शामिल 50 में से 42 कंपनियों के शेयर गिरावट में कारोबार कर रहे हैं। खासतौर पर रियल्टी और ऑयल एंड गैस सेक्टर पर सबसे ज्यादा मार पड़ी है। ऑयल एंड गैस इंडेक्स 1.57% और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 1.10% तक लुढ़क गए हैं। बैंकिंग, ऑटो और मेटल सेक्टर्स भी बिकवाली के दबाव में नजर आ रहे हैं।

भारतीय शेयर बाजार

वैश्विक बाजारों में भी दिखी कमजोरी की लहर
एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई 0.90% की तेजी में रहा, लेकिन हांगकांग का हैंगसेंग 1.12% और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.68% गिरावट में रहे। अमेरिकी बाजार भी स्थिर नजर नहीं आए। Dow Jones में 0.38% की गिरावट रही, जबकि Nasdaq 0.15% की मामूली तेजी में बंद हुआ।

FII-DII डेटा: घरेलू निवेशक खरीदारी में, विदेशी निवेशक बिकवाली में
30 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 850 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 1,829 करोड़ रुपये की नेट खरीदारी की। जुलाई महीने में FIIs अब तक 42,078 करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं, वहीं DIIs ने 54,566 करोड़ की भारी-भरकम खरीदारी की है।

मार्केट में अस्थिरता का दौर बना रहेगा?
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ ऐलान से बाजार में शॉर्ट टर्म वॉलेटिलिटी बनी रहेगी। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशक फिलहाल बाजार को सपोर्ट देने में जुटे हुए हैं, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार पर लगातार बना रहेगा।

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