Thursday, September 24, 2026
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Scam : कोठी से दूतावास तक – कैसे एक ठग ने खड़ी की फर्जी राजनयिक दुनिया

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Scam : गाजियाबाद के कविनगर इलाके की एक आलीशान कोठी में STF की छापेमारी ने सभी को चौंका दिया। बाहर से यह कोठी एक इंटरनेशनल दूतावास जैसी दिखती थी — डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स, विदेशी झंडों से सजी लग्जरी गाड़ियां और अंदर-बाहर घूमते सूट-बूट वाले लोग। लेकिन अंदर का सच कुछ और ही था: ये सबकुछ एक बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा था। इसका मास्टरमाइंड था हर्षवर्धन जैन — एक ऐसा शातिर ठग जिसने खुद को 4 फर्जी देशों का राजदूत घोषित कर रखा था।

चार-चार फर्जी दूतावास, एक ही कोठी में! हर्षवर्धन जैन ने अपने फर्जी साम्राज्य की नींव कविनगर की उसी कोठी में रखी थी, जहां से वह वेस्ट आर्कटिक, सबोरगा, पौलविया और लोडोनिया जैसे काल्पनिक देशों के दूतावास चला रहा था। इन नामों में से कुछ असल में एनजीओ थे जिन्हें वह देश बताकर अपनी ठगी की मशीनरी चला रहा था।

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53 बार दुबई यात्रा, इंटरनेशनल कनेक्शन का ड्रामा जांच में खुलासा हुआ है कि वह बीते 10 साल में 53 बार दुबई गया और कुल 30 से अधिक देशों की यात्रा की। UK, UAE, मॉरीशस, फ्रांस, कैमरून, पोलैंड, बेल्जियम और श्रीलंका जैसे देशों में वह खुद को डिप्लोमैटिक पहचान के साथ पेश करता रहा। मकसद था — खुद को इंटरनेशनल ब्रांड बनाना ताकि भारत में लोग जल्दी विश्वास कर लें।

डिप्लोमैटिक दिखावे का पूरा तामझाम STF की रेड में कोठी से नकली पासपोर्ट, प्रेस कार्ड, विदेशी करेंसी, ID कार्ड, पैन कार्ड, नकली सरकारी मुहरें, 12 फर्जी पासपोर्ट और 20 से अधिक डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स बरामद हुईं। यहां तक कि कोठी की दीवारों पर पीतल के बोर्ड लगे थे जो दूतावासों जैसा माहौल बनाते थे।

हवाला, लाइजनिंग और फर्जी कंपनियों का नेटवर्क STF की शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि हर्षवर्धन हवाला नेटवर्क और लाइजनिंग के काम में भी सक्रिय था। वह ब्लैक मनी को व्हाइट करने, विदेश भेजने और बड़े ठेकों में सेटिंग कराने के नाम पर लोगों से मोटी रकम ऐंठता था।

चंद्रास्वामी और इंटरनेशनल डीलर्स से संपर्क उसकी जिंदगी का असली मोड़ तब आया जब वह कुख्यात तांत्रिक चंद्रास्वामी के संपर्क में आया। इसके बाद उसकी पहचान इंटरनेशनल आर्म्स डीलर अदनान खागोशी और एहसान अली सैयद से हुई। उसने लंदन में 12 फर्जी कंपनियां बनाईं और खुद को इंटरनेशनल डिप्लोमैट जैसा प्रोजेक्ट करने लगा।

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अमीर बाप का बिगड़ैल बेटा हर्षवर्धन के पिता जेडी जैन गाजियाबाद में जैन रोलिंग मिल्स के मालिक थे। उनके निधन के बाद हर्षवर्धन ने पारिवारिक व्यापार संभालने की बजाय ठगी की राह पकड़ ली। उसने लंदन से MBA किया था लेकिन उसका इस्तेमाल उसने अपराधों को चमकाने में किया।

STF की सर्जिकल स्ट्राइक, परतें खुलना बाकी STF की इस कार्रवाई के बाद हर्षवर्धन का राज उजागर हो चुका है, लेकिन अब भी जांच जारी है। पुलिस उसके विदेशी नेटवर्क, हवाला ट्रांजैक्शन और संदिग्ध संपर्कों की तह में जा रही है। ये ठगी का मामला नहीं, बल्कि इंटरनेशनल अपराध कनेक्शन की गहरी साजिश भी हो सकती है।

निष्कर्ष: हर्षवर्धन जैन का फर्जी एंबेसी स्कैम दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति दिखावे और नकली पहचान के दम पर पूरे सिस्टम को बरगला सकता है। यह केस देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है कि अब ठग सिर्फ देसी स्कीम नहीं, बल्कि इंटरनेशनल फेस मास्क लगाकर आते हैं।

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