New Income Tax Bill-2025 : नई दिल्ली — भारत का टैक्स सिस्टम अब एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ा है। आयकर अधिनियम 1961 को खत्म कर नया इनकम टैक्स बिल, 2025 (New Income Tax Bill 2025) लाने की तैयारी तेज हो गई है। सोमवार, 22 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यह ऐतिहासिक रिपोर्ट लोकसभा में पेश की जाएगी।
यह नया बिल 6 दशकों से चले आ रहे आयकर कानून की जगह लेगा, और इसका मकसद टैक्स सिस्टम को न केवल सरल बनाना है, बल्कि मुकदमेबाजी को कम करते हुए करदाताओं को ज्यादा पारदर्शिता और सुविधा प्रदान करना है।
क्या है नया इनकम टैक्स बिल?
- यह बिल 1961 के आयकर अधिनियम को पूरी तरह रिप्लेस करेगा।
- इसे संसद की एक 31-सदस्यीय प्रवर समिति ने गहन समीक्षा के बाद तैयार किया है, जिसकी अध्यक्षता भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने की।
- इस बिल में कुल 285 बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं।
- 1961 के कानून की तुलना में इसकी भाषा आसान, धाराएं कम, और संरचना अधिक स्पष्ट है।
संख्या में कितना बदलाव?
| बिंदु | पुराना कानून (1961) | नया बिल (2025) |
|---|---|---|
| धाराएं (Sections) | 816+ | 536 |
| अध्याय (Chapters) | 47 | 23 |
| शब्दों की संख्या | 5.12 लाख | 2.6 लाख |
| टैक्स टेबल्स | 18 | 57 |
| हटाए गए प्रावधान | — | 1200+ |
| हटाए गए स्पष्टीकरण | — | 900+ |
Tax Year: अब होगा एक नया ‘कर वर्ष’
अब तक टैक्स सिस्टम में ‘Previous Year’ और ‘Assessment Year’ का कॉन्सेप्ट चलता था। नया बिल इसे खत्म कर एकीकृत टैक्स ईयर (Tax Year) का प्रावधान लाता है — जिससे टैक्स व्यवस्था को और पारदर्शी बनाने की कोशिश की गई है।
उदाहरण:
अभी तक:
2023-24 में कमाई → 2024-25 में टैक्स देना (Assessment Year)
नए सिस्टम में:
2024-25 ही Tax Year होगा, कमाई और टैक्स उसी में।
क्यों लाया जा रहा है ये बदलाव
- टैक्सपेयर्स के लिए भाषा और प्रक्रिया को सरल करना
- बेवजह की कानूनी जटिलता खत्म करना
- मुकदमेबाजी के मामलों को कम करना
- आधुनिक, डिजिटल और इनोवेटिव इकोनॉमी के अनुरूप टैक्स सिस्टम को ढालना
- अंतरराष्ट्रीय टैक्स प्रैक्टिस के स्तर पर भारत के कानून को लाना









