“मैं कलेक्टर का चपरासी नहीं हूं” : जयसिंह अग्रवाल का तीखा हमला, फेसबुक पोस्ट विवाद पर भड़के पूर्व मंत्री

VIKASH KHALKHO
#nishaanebaz.com

“मैं कलेक्टर का चपरासी नहीं हूं” : कोरबा। फेसबुक पोस्ट को लेकर पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल और कोरबा कलेक्टर अजीत वसंत के बीच विवाद गहराता जा रहा है। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करने को लेकर मंगलवार को कलेक्टर ने अग्रवाल को नोटिस जारी किया था। इसके जवाब में बुधवार को जयसिंह अग्रवाल ने तीखा बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने साफ कहा कि “मैं न तो कलेक्टर का चपरासी हूं, न उनका मातहत अधिकारी।” वहीं, कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि “जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है और ऐसे मामलों में नोटिस जारी करना उनकी ड्यूटी है।”

क्या है पूरा मामला?

14 जुलाई 2025 को जयसिंह अग्रवाल ने अपने फेसबुक अकाउंट से एक तस्वीर साझा की, जिसमें पूर्व मंत्री ननकीराम कंवर खड़े नजर आ रहे हैं, जबकि पास में राज्यपाल रमेन डेका और कलेक्टर अजीत वसंत बैठे हुए हैं।

इस तस्वीर के साथ जयसिंह अग्रवाल ने लिखा:

“छत्तीसगढ़ के वरिष्ठतम आदिवासी नेता का अपमान बहुत ही कष्टप्रद है… यह जान और सुनकर अत्यंत पीड़ा हुई।”

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कलेक्टर ने इसे “दुर्भावनापूर्ण और समाज में विद्वेष फैलाने वाला कृत्य” बताया और पोस्ट डिलीट करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि तस्वीर उस वक्त ली गई जब ननकीराम कंवर ज्ञापन देने के लिए अस्थायी रूप से खड़े हुए थे, जबकि उनके लिए बैठक की पूर्व-निर्धारित व्यवस्था थी।

जयसिंह अग्रवाल का तीखा बयान: “मैं कोई गवर्नमेंट सर्वेंट नहीं”

बुधवार को मीडिया से बात करते हुए जयसिंह अग्रवाल ने कहा:

“कलेक्टर को मुझे आदेश देने का कोई अधिकार नहीं है। मुझे न तो सस्पेंड कर सकते हैं और न कोई दंडात्मक कार्रवाई कर सकते हैं। मैं उनका चपरासी या मातहत नहीं हूं।”

उन्होंने आगे कहा:

“कलेक्टर कोई भी हो, आता है, जाता है। लेकिन हमने तो कोरबा में जीवन बिता दिया है। वो लोकसेवक हैं, उन्हें अपने दायरे में रहकर काम करना चाहिए।”

कलेक्टर की सफाई: “प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना मेरा कर्तव्य”

पूर्व मंत्री के इस बयान पर कलेक्टर अजीत वसंत ने जवाब दिया कि:

“जिले में शांति और व्यवस्था बनाए रखना कलेक्टर का दायित्व है। अगर किसी की ओर से ऐसा कोई कार्य या बयान आता है जिससे सामाजिक असंतोष फैल सकता है, तो प्रशासन उस पर कार्रवाई करता है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि नोटिस कानून और प्रक्रिया के तहत दिया गया है और इसमें कोई व्यक्तिगत दुर्भावना नहीं है।

नोटिस में क्या लिखा गया था?

नोटिस में कहा गया है कि:

  • फेसबुक पोस्ट को तत्काल हटाया जाए।

  • पोस्ट सामाजिक वर्गों में विद्वेष और शासन के खिलाफ असंतोष फैलाने वाली मानी जा रही है।

  • यह कार्य भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आ सकता है।

राजनीतिक तकरार या प्रशासनिक कार्रवाई?

यह मामला सिर्फ सोशल मीडिया पोस्ट का नहीं, बल्कि एक संवेदनशील तस्वीर की व्याख्या, राजनीतिक विरोध और प्रशासनिक प्रतिक्रिया का मिश्रण बन गया है। जहां जयसिंह अग्रवाल इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जनप्रतिनिधि की भूमिका से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द की जिम्मेदारी से जोड़ रहा है।

Share The News
Share This Article
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *