CG News: छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की परीक्षा व्यवस्था में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। एक अभ्यर्थी की उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी में चार पन्ने गायब मिले, जिनमें करीब 30 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लिखे होने की बात सामने आई। मामले की सुनवाई करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट ने आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही आयोग को संबंधित अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये का मुआवजा तीन महीने के भीतर देने का निर्देश दिया।
RTI से मिली उत्तरपुस्तिका में सामने आई गड़बड़ी
यह मामला CGPSC की एक प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थी ने अपनी उत्तरपुस्तिका और मूल्यांकन की जानकारी हासिल करने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आवेदन किया था। इसके बाद आयोग की ओर से उसे उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी उपलब्ध कराई गई।
अभ्यर्थी ने जब इस फोटोकॉपी की बारीकी से जांच की, तो उसमें चार पन्ने गायब मिले। इसके बाद उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हुए। अभ्यर्थी का कहना था कि गायब पन्नों में उसके लिखे हुए उत्तर थे, जिनका मूल्यांकन नहीं हो सका।
करीब 30 अंकों के उत्तरों पर असर पड़ने का दावा
उत्तरपुस्तिका से गायब चार पन्नों में करीब 30 अंकों के प्रश्नों के उत्तर लिखे होने की बात सामने आई। ऐसे में अभ्यर्थी ने आशंका जताई कि उसके उत्तरों का मूल्यांकन नहीं होने से परीक्षा परिणाम प्रभावित हुआ। परीक्षा में लिखे गए उत्तरों का सही तरीके से मूल्यांकन होना अभ्यर्थियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में उत्तरपुस्तिका के पन्ने गायब मिलने से आयोग की परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे।
संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर हाईकोर्ट पहुंचा अभ्यर्थी
उत्तरपुस्तिका में पन्ने गायब मिलने के बाद अभ्यर्थी ने आयोग से जवाब मांगा। आरोप है कि उसे संतोषजनक जवाब नहीं मिला और मामले की जांच भी गंभीरता से नहीं की गई। इसके बाद उसने न्याय के लिए बिलासपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
याचिका में आयोग की लापरवाही का मुद्दा उठाते हुए कहा गया कि उत्तरपुस्तिका में पन्ने गायब होने से उसके परिणाम और भविष्य पर असर पड़ सकता है। मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ में हुई।
आयोग की कार्यप्रणाली पर हाईकोर्ट की नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CGPSC की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने माना कि आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था से इस तरह की लापरवाही की अपेक्षा नहीं की जाती। मामले में शिकायत सामने आने के बाद भी जांच को गंभीरता से नहीं लेने और समय पर पूरी नहीं करने को लेकर भी सवाल उठे।अदालत के सख्त रुख के बाद आयोग पर आर्थिक दंड लगाने और अभ्यर्थी को मुआवजा देने का आदेश दिया गया।
तीन महीने के भीतर देना होगा 50 हजार रुपये का मुआवजा
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में दो अहम निर्देश दिए हैं। पहला, CGPSC पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। दूसरा, आयोग को संबंधित अभ्यर्थी को 50 हजार रुपये का मुआवजा तीन महीने के भीतर देना होगा।यह मामला परीक्षा में पारदर्शिता, उत्तरपुस्तिकाओं की सुरक्षित रखरखाव व्यवस्था और शिकायतों के समय पर निपटारे के महत्व को सामने लाता है। अभ्यर्थियों के लिए उत्तरपुस्तिका का सही मूल्यांकन उनके परीक्षा परिणाम से सीधे जुड़ा होता है। ऐसे में इस तरह की चूक पर अदालत की सख्ती परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर अहम संदेश देती है।