MP News: मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के कौशल विकास के लिए चल रहे मिशन कर्मयोगी के तहत प्रशिक्षण में बेहद कम भागीदारी सामने आई है। आईगॉट कर्मयोगी पोर्टल पर पंजीकृत कर्मचारियों में से दो प्रतिशत से भी कम के प्रशिक्षण पूरा करने की बात कही जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने विभागीय अधिकारियों के साथ संभागायुक्तों और कलेक्टरों को भी सक्रियता बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
खास बात यह है कि 31 जुलाई 2026 की स्थिति में मध्यप्रदेश की राष्ट्रीय स्तर पर रैंकिंग तीसरे स्थान पर बताई गई है, लेकिन प्रशिक्षण में कर्मचारियों की कम भागीदारी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है। अब विभागों को कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण से जोड़ने और पोर्टल पर उनकी गतिविधियों की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
विभागाध्यक्षों और कलेक्टरों को मिली जिम्मेदारी
सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागायुक्तों और कलेक्टरों से कहा है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की प्रशिक्षण में भागीदारी बढ़ाएं। इसके लिए विभागीय अधिकारियों और नोडल अधिकारियों को पोर्टल पर कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया है।
जिन कर्मचारियों ने प्रशिक्षण पूरा नहीं किया है, उन्हें नियमित रूप से पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सरकार का जोर इस बात पर है कि प्रशिक्षण केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि कर्मचारियों की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली का हिस्सा बने।
Read More: MP News: Digvijay Singh की सनातन यात्रा पर CM मोहन यादव का तंज, बोले- भगवान के नाम पर भाव भी जरूरी
हर महीने कम से कम एक घंटे की ट्रेनिंग
मिशन कर्मयोगी के तहत कर्मचारियों को हर महीने कम से कम एक घंटे का आईगॉट प्रशिक्षण पूरा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पोर्टल पर प्रशासनिक कामकाज, कौशल विकास और जिम्मेदारी के अनुसार प्रशिक्षण से जुड़े ऑनलाइन पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं।
इस पहल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाना और उन्हें बदलती प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। विभागों को विषय विशेषज्ञों का नामांकन करने और प्रशिक्षण की प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मई से अगस्त तक प्रशिक्षण के आंकड़े बेहद कम
रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, मध्यप्रदेश में प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मचारियों का प्रतिशत लगातार कम रहा है।इन आंकड़ों से पता चलता है कि संबंधित अवधि में प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी दो प्रतिशत से नीचे रही। जून में इसमें कुछ बढ़ोतरी हुई, लेकिन जुलाई और अगस्त में प्रतिशत फिर कम हो गया।
पोर्टल पर करीब 9.08 लाख कर्मचारी पंजीकृत
मध्यप्रदेश में आईगॉट कर्मयोगी पोर्टल पर कुल 9,07,538 शासकीय सेवकों के पंजीकृत होने की जानकारी दी गई है। इनमें 5 लाख 6 हजार से अधिक सक्रिय लोक सेवक बताए गए हैं, जबकि 3,89,698 कर्मचारी निष्क्रिय श्रेणी में हैं।
Read More: MP IAS Promotion 2026: मध्यप्रदेश के 13 SAS अफसर बन सकते हैं IAS, सूची में 10 महिलाएं
इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों के निष्क्रिय रहने से प्रशिक्षण अभियान को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाना जरूरी हो गया है। सरकार चाहती है कि पंजीकृत कर्मचारी केवल पोर्टल पर नाम दर्ज कराने तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से पाठ्यक्रम पूरा भी करें।
तीसरी रैंकिंग के बावजूद चुनौती बरकरार
31 जुलाई 2026 की स्थिति में मध्यप्रदेश की राष्ट्रीय रैंकिंग तीसरे स्थान पर बताई गई है। हालांकि, प्रशिक्षण पूरा करने वाले कर्मचारियों का कम प्रतिशत विभागों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
अब सामान्य प्रशासन विभाग की कोशिश है कि अधिकारियों की निगरानी और नियमित समीक्षा के जरिए कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाई जाए। प्रशिक्षण अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने कर्मचारी नियमित रूप से पाठ्यक्रम पूरा करते हैं और उससे अपने कामकाज में सुधार लाते हैं।