Dussehra: दशहरे पर भगवान श्रीराम और रावण के युद्ध की कथा याद की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका पर विजय पाने से पहले श्रीराम ने शक्ति की आराधना भी की थी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान राम के रघुकुल की कुलदेवी कौन मानी जाती हैं और उनका मंदिर आज भी अयोध्या में मौजूद है?
माता बड़ी देवकाली को माना जाता है रघुकुल की कुलदेवी
भगवान श्रीराम का जन्म सूर्यवंश के रघुकुल में हुआ था। इसी वंश की कुलदेवी के रूप में माता बड़ी देवकाली की पूजा की जाती है। उन्हें माता चंडिका के स्वरूप से भी जोड़ा जाता है।
अयोध्या के बड़ी देवकाली मंदिर के गर्भगृह में महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी के स्वरूपों के दर्शन होने की मान्यता है। यह मंदिर अयोध्या में देवी शक्ति की आराधना से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है।
रावण से युद्ध से पहले श्रीराम ने की थी शक्ति की उपासना
धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में लंका युद्ध से पहले भगवान श्रीराम द्वारा शक्ति की आराधना का उल्लेख मिलता है। देवी भागवत और कृतिवास रामायण से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, श्रीराम ने रावण पर विजय पाने के लिए शारदीय नवरात्रि के दौरान देवी की विशेष पूजा की थी। इस परंपरा को अकाल बोधन के नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक कथाओं में शक्ति की उपासना को कठिन परिस्थितियों का सामना करने और विजय प्राप्त करने के लिए आशीर्वाद मांगने से जोड़ा जाता है। इसी कारण नवरात्रि और दशहरे के अवसर पर देवी दुर्गा की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
महाराज रघु से जुड़ी है मंदिर की स्थापना की कथा
माता बड़ी देवकाली मंदिर की स्थापना को लेकर एक प्रचलित कथा महाराज रघु से जुड़ी है। मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम के पूर्वज महाराज रघु एक युद्ध पर जाने की तैयारी कर रहे थे। युद्ध को लेकर चिंतित होने पर उन्होंने मां शक्ति की आराधना की। कथा के मुताबिक, देवी ने प्रसन्न होकर उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया और वहां विशेष यज्ञ करने का निर्देश दिया।
युद्ध में विजय प्राप्त करने के बाद महाराज रघु ने उसी स्थान पर देवी शक्ति के तीन स्वरूपों की स्थापना की। इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर माता बड़ी देवकाली को रघुकुल की कुलदेवी माना जाता है।
माता छोटी देवकाली और माता सर्वमंगला का संबंध
अयोध्या में शक्ति उपासना से जुड़ी एक अन्य मान्यता माता छोटी देवकाली को लेकर भी है। कुछ धार्मिक परंपराओं में माता सीता द्वारा पूजित जनकपुर की माता सर्वमंगला पार्वती को अयोध्या में छोटी देवकाली के रूप में पूजने की बात कही जाती है। इस तरह अयोध्या में बड़ी और छोटी देवकाली से जुड़ी मान्यताएं देवी उपासना की परंपरा को दर्शाती हैं।
माता बड़ी देवकाली का मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। दशहरे और नवरात्रि जैसे पर्वों पर भगवान श्रीराम की विजय कथा के साथ शक्ति की आराधना की यह परंपरा भी विशेष महत्व रखती है।