जगदलपुर/बस्तर। Nishaanebaz.com-Bastar Muria Darbar Controversy: विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की लगभग 700 साल पुरानी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपरा ‘मुरिया दरबार’ के नाम को लेकर छत्तीसगढ़ में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। स्थिति की नजाकत को देखते हुए जिला प्रशासन को तुरंत अपने कदम पीछे खींचने पड़े और नया संशोधित पाम्पलेट जारी करना पड़ा।
पाम्पलेट में नाम बदलने पर क्यों मचा बवाल
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब बस्तर दशहरा के आयोजनों और कार्यक्रमों की जानकारी देने वाले आधिकारिक प्रशासनिक पाम्पलेट में पारंपरिक नाम ‘मुरिया दरबार’ की जगह ‘आम दरबार’ छाप दिया गया। जैसे ही यह पाम्पलेट सामने आया, सोशल मीडिया पर इस बदलाव को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं और सवाल उठने लगे। लोगों ने इसे बस्तर की सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत के साथ छेड़छाड़ करार दिया, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया। मामले के तूल पकड़ने और विरोध बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए नया पाम्पलेट जारी किया, जिसमें ‘आम दरबार’ के स्थान पर फिर से मूल नाम ‘मुरिया दरबार’ दर्ज कर दिया गया है।
क्या है मुरिया दरबार का ऐतिहासिक महत्व
बस्तर की यह परंपरा यहाँ की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था का एक अहम और जीवंत हिस्सा है। राजशाही के दौर में राजा इस दरबार में बकायदा बैठते थे, जहाँ गांवों से आने वाले मांझी-चालकी अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं और शिकायतें रखते थे और राजा उनका त्वरित समाधान करते थे। रियासतों का विलय होने और राजशाही समाप्त होने के बाद भी यह गौरवशाली परंपरा आज तक अनवरत जारी है। अब इस दरबार में प्रदेश के मुख्यमंत्री और शीर्ष गणमान्य अतिथि पहुंचकर स्थानीय आदिवासियों और पारंपरिक प्रतिनिधियों की समस्याएं सुनते हैं।
इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के शामिल होने का कार्यक्रम
इस ऐतिहासिक आयोजन के महत्व को इस बात से भी समझा जा सकता है कि पिछले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस दरबार में विशेष रूप से शामिल हुए थे, जबकि इस बार देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के इस पारंपरिक दरबार में शामिल होने का भव्य कार्यक्रम तय है। राष्ट्रपति यहाँ पहुंचकर मांझी-चालकी और अन्य पारंपरिक प्रतिनिधियों से सीधे संवाद करेंगी और उनके गांवों की समस्याओं को सुनेंगी। ऐसे में नाम बदलने को लेकर उपजा विवाद केवल एक पाम्पलेट की गलती नहीं, बल्कि बस्तर की लोक-संस्कृति और अस्मिता से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन गया था, जिसे समय रहते प्रशासन ने सुधार लिया है।