Health: सुबह आंख खुलते ही मोबाइल चेक करना कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। कुछ लोग जरूरी काम के अपडेट देखने के लिए फोन उठाते हैं, तो कुछ की आदत बिना किसी खास वजह के स्क्रीन स्क्रॉल करने की होती है। हालांकि, मोबाइल चेक करना अपने आप में दिल के लिए नुकसानदायक नहीं है, लेकिन सुबह सबसे पहले मिलने वाली जानकारी अगर आपको परेशान या चिंतित करती है, तो इससे तनाव बढ़ सकता है। लंबे समय तक तनाव, नींद की कमी और अस्वस्थ दिनचर्या हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
फोन की आदत कैसे बढ़ा सकती है तनाव?
सुबह उठते ही फोन देखने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं। किसी को ऑफिस के ईमेल चेक करने होते हैं, तो कोई रातभर की खबरें और सोशल मीडिया अपडेट देखना चाहता है। धीरे-धीरे यह आदत इतनी नियमित हो जाती है कि व्यक्ति उठते ही बिना सोचे फोन खोल लेता है।
परेशानी तब हो सकती है, जब स्क्रीन पर काम का दबाव, नकारात्मक खबरें या चिंता बढ़ाने वाले संदेश दिखाई दें। ऐसी जानकारी कुछ लोगों में बेचैनी और तनाव पैदा कर सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। फोन पर सकारात्मक संदेश या पसंदीदा संगीत देखना कुछ लोगों का मूड बेहतर भी कर सकता है।
तनाव का हार्ट रेट और बीपी से कनेक्शन
जब दिमाग किसी स्थिति को तनावपूर्ण या चुनौतीपूर्ण समझता है, तो शरीर का स्ट्रेस रिस्पॉन्स सक्रिय हो सकता है। इस दौरान एड्रेनालाइन जैसे हार्मोन रिलीज होते हैं, जिससे हार्ट रेट, सांस लेने की गति और ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए बढ़ सकते हैं। यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया है, जो उसे चुनौती का सामना करने के लिए तैयार करती है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, तनाव के दौरान शरीर में होने वाले बदलाव हृदय गति और ब्लड प्रेशर को अस्थायी रूप से बढ़ा सकते हैं। वहीं, लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि, सुबह मोबाइल पर कोई परेशान करने वाली खबर पढ़ने से सीधे हार्ट डिजीज हो जाती है, ऐसा साबित नहीं हुआ है।
एंग्जायटी में क्यों तेज धड़कता है दिल?
तनाव या एंग्जायटी के दौरान शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो सकता है। इससे दिल तेजी से धड़कने लगता है और कुछ लोगों को बेचैनी, पसीना आने या सांस तेज चलने जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं। तनाव कम होने पर ये बदलाव सामान्य हो सकते हैं। लेकिन अगर बार-बार दिल की धड़कन तेज होती है या इसके साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी अथवा चक्कर आते हैं, तो इसे केवल तनाव मानकर नजरअंदाज न करें और चिकित्सकीय सलाह लें।
मोबाइल और नींद का क्या है संबंध?
अगर मोबाइल इस्तेमाल करने की वजह से रात में देर तक जागने की आदत बन गई है, तो नींद की अवधि और गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। पर्याप्त नींद न मिलना और लगातार तनाव में रहना लंबे समय में सेहत पर असर डाल सकता है। इसलिए सुबह उठते ही फोन देखने की आदत पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है, खासकर तब जब इससे आपकी बेचैनी बढ़ती हो।
सुबह की शुरुआत ऐसे करें
उठते ही फोन देखने के बजाय कुछ मिनट शांत बैठें, पानी पिएं और हल्की स्ट्रेचिंग या टहलने से दिन की शुरुआत करें। जरूरी नोटिफिकेशन ही चालू रखें और काम से जुड़े ईमेल देखने का एक तय समय बनाएं। अगर मोबाइल इस्तेमाल करने से तनाव बढ़ता महसूस हो, तो सुबह कुछ देर स्क्रीन से दूरी बनाकर देखें। छोटे बदलाव आपकी दिनचर्या को अधिक संतुलित बनाने में मदद कर सकते हैं।
