Chhattisgarh Paddy Procurement Price: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का मौसम नजदीक आते ही समर्थन मूल्य को लेकर बहस तेज हो गई है। भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर राज्य में धान खरीदी की दर बढ़ाने की मांग की है। संघ चाहता है कि किसानों से धान 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जाए। इसके साथ ही किसानों ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय के बकाया धान बोनस को जारी करने की मांग भी उठाई है। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 27 अक्टूबर को रायपुर में मंत्रालय का घेराव किया जाएगा।
किसान संघ के अनुसार, राज्य में फिलहाल धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है। संघ का कहना है कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कुल 258 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है। किसानों की मांग है कि इस बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए राज्य में धान खरीदी की दर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल तय की जाए।संघ का तर्क है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। खाद, बीज, डीजल, मजदूरी और सिंचाई पर किसानों को पहले के मुकाबले अधिक खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में धान की मौजूदा दर किसानों की बढ़ती लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है। हालांकि, 3,358 रुपये की दर फिलहाल किसान संघ की मांग है, सरकार की घोषित नई खरीदी दर नहीं।
बकाया धान बोनस जारी करने की मांग
धान की कीमत बढ़ाने के साथ किसान संघ ने बकाया बोनस का मुद्दा भी उठाया है। संघ के मुताबिक, पिछली कांग्रेस सरकार के समय का करीब 1,700 करोड़ रुपये का धान बोनस अब भी किसानों को दिया जाना बाकी है। संगठन ने सरकार से यह राशि जल्द जारी करने की मांग की है।किसान संघ का कहना है कि बोनस किसानों का हक है और इसे लंबे समय तक लंबित नहीं रखा जाना चाहिए। संघ ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में किसानों को बकाया राशि देने की मांग करते हुए इसे कृषि परिवारों को आर्थिक राहत देने से जुड़ा मुद्दा बताया है। इस राशि और पात्र किसानों की स्थिति को लेकर संबंधित सरकारी रिकॉर्ड से पुष्टि जरूरी है।
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27 अक्टूबर को मंत्रालय घेरने की चेतावनी
भारतीय किसान संघ ने राज्य सरकार को मांगों पर फैसला लेने के लिए अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने कहा है कि यदि धान खरीदी की दर बढ़ाने और बकाया बोनस जारी करने पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 27 अक्टूबर को रायपुर में मंत्रालय का घेराव किया जाएगा।संघ का दावा है कि इस प्रदर्शन में प्रदेश के अलग-अलग जिलों से हजारों किसान शामिल होंगे। संगठन ने साफ किया है कि वह किसानों के हितों से जुड़े मुद्दों पर पीछे नहीं हटेगा। अब इस चेतावनी के बाद सरकार की ओर से मांगों पर क्या रुख अपनाया जाता है, इस पर नजर रहेगी।
डिप्टी सीएम अरुण साव ने सरकार का पक्ष रखा
इस मामले पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को धान की सबसे ज्यादा कीमत दे रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में काम कर रही है और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है।अरुण साव ने धान के साथ दलहन, तिलहन और मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती को भी बढ़ावा देने की बात कही। सरकार का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसलों में विविधता को प्रोत्साहित करना है। हालांकि, किसान संघ की ओर से धान की दर और बकाया बोनस को लेकर उठाई गई मांगों पर अंतिम निर्णय की जानकारी सामने नहीं आई है।
अब सरकार के फैसले पर टिकी किसानों की नजर
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है। ऐसे में खरीदी की दर और बोनस जैसे मुद्दे किसानों की आमदनी पर सीधा असर डालते हैं। एक ओर किसान संघ बढ़ती लागत का हवाला देकर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल की दर मांग रहा है, वहीं सरकार अपनी मौजूदा नीति और कृषि क्षेत्र में विविधता को बढ़ावा देने की बात कह रही है।फिलहाल धान खरीदी की दर में बदलाव और बकाया बोनस पर सरकार के फैसले का इंतजार है। 27 अक्टूबर को प्रस्तावित मंत्रालय घेराव से पहले इस मुद्दे पर सरकार और किसान संगठन के बीच बातचीत होती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
