[Nishaanebaz News] Rewa Land Dispute: रीवा। रीवा जिले के गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के बेला गांव में जमीन विवाद को लेकर एक किसान ने करीब 72 घंटे से अधिक समय तक पानी से भरे गड्ढे में बैठकर जल-सत्याग्रह किया। अपनी और अन्य किसानों की कृषि भूमि की रक्षा तथा न्याय की मांग को लेकर किए जा रहे इस अनोखे विरोध प्रदर्शन की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन में हलचल मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी खुद मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारी युवक व उसके परिवार से चर्चा की।
तीन दिन तक पानी में बैठकर करता रहा विरोध
बेला गांव में जमीन विवाद को लेकर युवक पिछले करीब तीन दिनों से पानी के बीच बैठा हुआ था। बताया गया कि वह इस दौरान भूखा-प्यासा रहकर अपनी जमीन की सुरक्षा और न्याय की मांग कर रहा था। लगातार पानी में रहने के कारण उसकी तबीयत बिगड़ने लगी थी।परिजनों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया और कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी प्रशासनिक अमले के साथ मौके पर पहुंचे।
MP News: विधायक प्रदीप पटेल के नाम से बनी फर्जी Facebook ID, लोगों से मांगे जा रहे पैसे, मचा हड़कंप
ग्रामीणों ने लगाया जमीन पर कब्जे के प्रयास का आरोप
Rewa Land Dispute: पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का आरोप है कि अडानी समूह द्वारा उनकी निजी कृषि भूमि पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी युवक ने आरोप लगाया कि कंपनी के अधिकारियों और संबंधित अमले की ओर से उनके साथ अभद्रता की गई और विरोध करने पर झूठी एफआईआर में फंसाने की धमकी भी दी गई।हालांकि, इन आरोपों को लेकर प्रशासन की ओर से जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होने की बात कही गई है।
कलेक्टर ने मौके पर पहुंचकर सुनीं शिकायतें
मामले की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने प्रदर्शनकारी युवक और उसके परिजनों से सीधे बातचीत की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और किसी भी पक्ष के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।कलेक्टर के आश्वासन के बाद युवक को पानी से बाहर निकाला गया। लगातार पानी में रहने के कारण स्वास्थ्य बिगड़ने पर उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
फर्स्ट क्लास क्रिकेट खिलाड़ी होने का दावा
Rewa Land Dispute: प्रदर्शनकारी युवक के बारे में बताया जा रहा है कि वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट का खिलाड़ी भी रहा है। जमीन को लेकर चल रहे विवाद के समाधान और अपनी कृषि भूमि बचाने की मांग को लेकर उसने जल-सत्याग्रह का रास्ता अपनाया।
आश्वासन के बाद आंदोलन स्थगित, ग्रामीणों की चेतावनी
कलेक्टर के आश्वासन के बाद फिलहाल युवक और ग्रामीणों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि यदि जमीन विवाद का पारदर्शी समाधान नहीं हुआ और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती मामले की निष्पक्ष जांच कर जमीन विवाद का समाधान निकालना है, ताकि लंबे समय से चल रहे विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से खत्म किया जा सके।






