Quality Negligence In MP Construction: न इंजीनियर, न एसडीओ… बैतूल में सरकारी बोरवेल का पानी और मिट्टी वाली रेत से रच दिया गया बड़ा खेल!

VIKASH KHALKHO

बैतूल। Nishaanebaz.com-Betul Horticulture Building Scam: मध्य प्रदेश के बैतूल जिला मुख्यालय पर उद्यानिकी विभाग के नए प्रशासनिक भवन के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। महज 4 महीने के भीतर बनकर तैयार हुई इस सरकारी इमारत की गुणवत्ता की पोल पहली ही नजर में खुल गई है। दीवारों में अभी से बड़ी-बड़ी दरारें आने लगी हैं, वहीं सीढ़ियों और मुख्य दीवार के बीच 3 से 4 इंच का गैप साफ नजर आ रहा है। बिना उचित रॉड (सरिया) ढाले किया गया यह निर्माण और खुले में लटकते बिजली के नंगे तार किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं।

Read More : Health Services At Risk In MP: ‘जवाबदेही शासन-प्रशासन की होगी!’… जानिए रीवा में 3 प्रोफेसरों पर गाज गिरने के बाद क्यों भड़का रोष?

ठेका किसी का, काम करा रहा कोई और; नदारद मिले जिम्मेदार इस पूरे निर्माण कार्य में सबसे बड़ी पहेली ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, इस भवन निर्माण का आधिकारिक ठेका ‘सहकारी विपणन संघ’ के नाम पर स्वीकृत हुआ है, लेकिन मौके पर भदौरिया नामक व्यक्ति द्वारा निर्माण कराया जा रहा है, जिसने काम को आगे बैतूल के ही एक स्थानीय लेबर कॉन्ट्रेक्टर को सौंप रखा है।

हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल पर न तो मूल ठेकेदार मौजूद रहता है, न कोई विभागीय इंजीनियर और न ही एसडीओ (SDO)। पूरी सरकारी इमारत की मॉनिटरिंग का जिम्मा केवल एक लेबर कॉन्ट्रेक्टर और कामगारों के भरोसे छोड़ दिया गया है।

Read More : NPCI And Finance Ministry Relief: व्यापारियों और आम जनता को बड़ी राहत, 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित एमडीआर निर्णय पर सरकार ने लगाई रोक

सरकारी ट्यूबवेल के पानी और घटिया सामग्री का बेधड़क इस्तेमाल स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का गंभीर आरोप है कि ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य के लिए पास ही स्थित सरकारी ट्यूबवेल से मुफ्त पानी का बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही निर्माण में निर्धारित मानकों को दरकिनार कर लोकल लोहे का उपयोग किया गया है—जहां 16 एमएम (इंच) का सरिया लगना था, वहां पूरे भवन में 10 और 12 एमएम का कमजोर सरिया ठोंक दिया गया है।

बालू (रेत) में अत्यधिक मिट्टी मिली हुई है और डस्ट का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां तक कि सेप्टिक टैंक के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर तकनीकी गड़बड़ियां की गई हैं।

Read More : MG M9 का जलवा! लग्जरी इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में 60% उछाल, जानें क्यों खास है यह MPV

सुरक्षा व्यवस्था शून्य, उपसंचालक के दफ्तर की नाक तले चल रहा खेल निर्माण स्थल पर न तो कोई सरकारी सूचना पटल (सूचना बोर्ड) लगाया गया है और न ही स्वीकृत राशि अथवा निर्माण एजेंसी का उल्लेख है। नंगे बिजली के तार चारों ओर फैले हैं, जिससे मजदूरों और आम जनता की जान खतरे में है।

इस पूरी धांधली पर उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक (DD) आर.के. कोरी और विभागीय इंजीनियरों की खामोशी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या 4 महीने में तैयार इस जर्जर भवन की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी या यह मामला भी कागजी फाइलों में दबा दिया जाएगा?

Share The News
Share This Article
विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
1 Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *