बैतूल। Nishaanebaz.com-Betul Horticulture Building Scam: मध्य प्रदेश के बैतूल जिला मुख्यालय पर उद्यानिकी विभाग के नए प्रशासनिक भवन के निर्माण में भारी भ्रष्टाचार और नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। महज 4 महीने के भीतर बनकर तैयार हुई इस सरकारी इमारत की गुणवत्ता की पोल पहली ही नजर में खुल गई है। दीवारों में अभी से बड़ी-बड़ी दरारें आने लगी हैं, वहीं सीढ़ियों और मुख्य दीवार के बीच 3 से 4 इंच का गैप साफ नजर आ रहा है। बिना उचित रॉड (सरिया) ढाले किया गया यह निर्माण और खुले में लटकते बिजली के नंगे तार किसी बड़े हादसे को खुला न्योता दे रहे हैं।
ठेका किसी का, काम करा रहा कोई और; नदारद मिले जिम्मेदार इस पूरे निर्माण कार्य में सबसे बड़ी पहेली ठेकेदारी व्यवस्था को लेकर बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, इस भवन निर्माण का आधिकारिक ठेका ‘सहकारी विपणन संघ’ के नाम पर स्वीकृत हुआ है, लेकिन मौके पर भदौरिया नामक व्यक्ति द्वारा निर्माण कराया जा रहा है, जिसने काम को आगे बैतूल के ही एक स्थानीय लेबर कॉन्ट्रेक्टर को सौंप रखा है।
बैतूल में उद्यानिकी विभाग के नए भवन में दरारें और सीढ़ियों के बीच गैप मिलने पर निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे। घटिया सामग्री के इस्तेमाल और नियमों की अनदेखी के आरोपों के बीच जांच की मांग उठ रही है।
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— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) October 13, 2026
हैरानी की बात यह है कि निर्माण स्थल पर न तो मूल ठेकेदार मौजूद रहता है, न कोई विभागीय इंजीनियर और न ही एसडीओ (SDO)। पूरी सरकारी इमारत की मॉनिटरिंग का जिम्मा केवल एक लेबर कॉन्ट्रेक्टर और कामगारों के भरोसे छोड़ दिया गया है।
सरकारी ट्यूबवेल के पानी और घटिया सामग्री का बेधड़क इस्तेमाल स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का गंभीर आरोप है कि ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य के लिए पास ही स्थित सरकारी ट्यूबवेल से मुफ्त पानी का बेधड़क इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके साथ ही निर्माण में निर्धारित मानकों को दरकिनार कर लोकल लोहे का उपयोग किया गया है—जहां 16 एमएम (इंच) का सरिया लगना था, वहां पूरे भवन में 10 और 12 एमएम का कमजोर सरिया ठोंक दिया गया है।
बालू (रेत) में अत्यधिक मिट्टी मिली हुई है और डस्ट का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है। यहां तक कि सेप्टिक टैंक के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर तकनीकी गड़बड़ियां की गई हैं।
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सुरक्षा व्यवस्था शून्य, उपसंचालक के दफ्तर की नाक तले चल रहा खेल निर्माण स्थल पर न तो कोई सरकारी सूचना पटल (सूचना बोर्ड) लगाया गया है और न ही स्वीकृत राशि अथवा निर्माण एजेंसी का उल्लेख है। नंगे बिजली के तार चारों ओर फैले हैं, जिससे मजदूरों और आम जनता की जान खतरे में है।
इस पूरी धांधली पर उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक (DD) आर.के. कोरी और विभागीय इंजीनियरों की खामोशी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या 4 महीने में तैयार इस जर्जर भवन की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी या यह मामला भी कागजी फाइलों में दबा दिया जाएगा?


