Wednesday, October 7, 2026
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RBI Monetary Policy: आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% किया, बढ़ती महंगाई और वैश्विक दबाव के बीच बड़ा फैसला

मुंबई। Nishaanebaz.com-RBI Monetary Policy Update: वैश्विक उथल-पुथल और बढ़ती महंगाई के दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने नीतिगत दरों में बदलाव किया है। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (0.25%) की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है। इस कदम से साफ है कि निकट भविष्य में लोन की ईएमआई (EMI) कम होने की कोई संभावना नहीं है, बल्कि ब्याज दरें उच्च स्तर पर बनी रह सकती हैं।

आरबीआई की बैठकों और बयानों के बीच केंद्रीय बैंक के अधिकारियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत पहलुओं को भी रेखांकित किया है। आरबीआई की डिप्टी गवर्नर और एमपीसी की सदस्य पूनम गुप्ता ने कहा कि पहली तिमाही में देश की 7.8% की विकास दर बेहद शानदार रही और इसके मुकाबले महंगाई नियंत्रण में रही। उन्होंने बताया कि भारत की फिस्कल समझदारी और बचत तथा निवेश के मजबूत घरेलू स्रोत ग्लोबल कैपिटल पर हमारी निर्भरता को कम करते हैं, जिससे देश वैश्विक उथल-पुथल के बीच खुद को सुरक्षित रखने में सक्षम होता है।

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रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष (FY27) के लिए देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान 7.1% लगाया है, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। हालांकि, बढ़ती खुदरा महंगाई को देखते हुए चालू वित्त वर्ष के लिए औसत महंगाई दर का अनुमान बढ़ाकर 5.2% कर दिया गया है। गवर्नर ने यह भी घोषणा की कि तेजी से बदलते वित्तीय बाजारों और बुनियादी ढांचे को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय बैंक वित्तीय बाजारों के लिए एक नई ‘तकनीकी परामर्श समिति’ का गठन करेगा।

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बैंकिंग सेक्टर की सेहत पर बात करते हुए गवर्नर ने स्पष्ट किया कि शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों की पूंजी पर्याप्तता (Capital Adequacy), लिक्विडिटी और एसेट क्वालिटी के सिस्टम-लेवल पैरामीटर पूरी तरह मजबूत हैं और एनपीए नियंत्रण में है। हालांकि, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों की मांग में सुस्ती जरूर देखी गई है, लेकिन त्योहारी और निजी खर्च के मामले में शहरी अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है। वैश्विक मोर्चे पर फेडरल रिजर्व के फैसलों और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच आरबीआई देश के मैक्रो-इकोनॉमिक फंडामेंटल्स को मजबूत बनाए रखने के लिए लगातार प्रतिबद्ध नजर आ रहा है।

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