CG News: धमतरी। जिले के भटगांव के मजराटोला में एक महिला के अंतिम संस्कार को लेकर रविवार को विवाद की स्थिति बन गई। महिला की मौत के बाद परिवार अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहा था, लेकिन परिवार के धर्म परिवर्तन को लेकर ग्रामीणों और समाज के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। इसके चलते अंतिम संस्कार को लेकर करीब पांच घंटे तक गांव में चर्चा और विवाद की स्थिति बनी रही। बाद में परिवार की सहमति से हिंदू रीति-रिवाज अपनाने की प्रक्रिया पूरी कराई गई, जिसके बाद महिला का अंतिम संस्कार गांव में ही किया गया।
जानकारी के मुताबिक, 3 अक्टूबर की रात सुरेश ध्रुव की पत्नी सरस्वती की मौत हो गई थी। अगले दिन सुबह परिवार के लोग अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे थे। इसी दौरान समाज के लोगों ने परिवार के कथित धर्म परिवर्तन का हवाला देते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके बाद मामला गांव की बैठक तक पहुंच गया। अंतिम संस्कार को लेकर काफी देर तक ग्रामीणों और परिवार के बीच चर्चा होती रही।
धर्मांतरण के आरोप को लेकर बढ़ा विवाद
ग्रामीणों का दावा है कि सुरेश ध्रुव का परिवार पिछले करीब चार वर्षों से ईसाई धर्म का पालन कर रहा था। इसी आधार पर समाज के लोगों ने हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार में शामिल होने को लेकर आपत्ति जताई। मामला बढ़ने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे।
कई घंटे तक चली बातचीत के बाद परिवार की ओर से हिंदू धर्म की परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों को दोबारा अपनाने की सहमति जताई गई। इसके बाद सुरेश ध्रुव को गंगाजल और तुलसी का पत्ता दिया गया तथा तिलक लगाकर धार्मिक प्रक्रिया पूरी कराई गई।
घर वापसी के बाद अंतिम संस्कार की मिली अनुमति
धार्मिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम संस्कार को लेकर बनी स्थिति शांत हुई। इसके बाद महिला सरस्वती के शव का गांव के शांति घाट में हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। बताया गया कि इस दौरान परिवार और ग्रामीणों के बीच सहमति बनने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी हो सकी।गांव के सरपंच फांगूराम साहू ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मामला मजराटोला का है और महिला का अंतिम संस्कार गांव में ही कराया गया।
कई घंटे तक गांव में बनी रही स्थिति
घटना के बाद गांव में करीब पांच घंटे तक अंतिम संस्कार को लेकर चर्चा और विवाद की स्थिति बनी रही। परिवार और ग्रामीणों के बीच बातचीत के बाद मामला शांत हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि धार्मिक पहचान और सामाजिक परंपराओं से जुड़े मुद्दे के कारण विवाद पैदा हुआ था।
वहीं, इस पूरे मामले में धर्म परिवर्तन को लेकर लगाए गए दावे ग्रामीणों की ओर से बताए गए हैं। अंतिम संस्कार को लेकर किसी भी विवाद या धार्मिक पहचान से जुड़े मामले में कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है।घटना के बाद महिला का अंतिम संस्कार तो हो गया, लेकिन इस घटनाक्रम ने ग्रामीण क्षेत्रों में धर्मांतरण, सामाजिक परंपराओं और अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को लेकर एक बार फिर चर्चा को सामने ला दिया है।






