हिंदी सिनेमा के दिग्गज निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी ने आम आदमी और मध्यमवर्गीय परिवारों की जिंदगी को बेहद सहज अंदाज में पर्दे पर पेश किया। उनकी फिल्मों में पारिवारिक रिश्ते, दोस्ती, प्यार, संघर्ष और रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियां इतनी स्वाभाविक नजर आती थीं कि दर्शक खुद को उनकी कहानियों से जोड़ लेते थे।
30 सितंबर को उनकी जयंती के मौके पर जानिए उनकी 5 ऐसी फिल्मों के बारे में, जिन्हें हिंदी सिनेमा की यादगार फिल्मों में गिना जाता है।
सत्यकाम (1969)
‘सत्यकाम’ में धर्मेंद्र ने सत्यप्रिय आचार्य का किरदार निभाया था। फिल्म एक ऐसे आदर्शवादी युवक की कहानी है, जो पूरी जिंदगी ईमानदारी और सच्चाई के साथ जीना चाहता है। लेकिन जब उसका सामना वास्तविक दुनिया से होता है, तो उसके आदर्शों और समाज की हकीकत के बीच टकराव सामने आता है।
आनंद (1971)
‘आनंद’ ऋषिकेश मुखर्जी की सबसे यादगार फिल्मों में शामिल है। इसमें राजेश खन्ना ने आनंद सहगल और अमिताभ बच्चन ने डॉक्टर भास्कर का किरदार निभाया था।
फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसे अपनी गंभीर बीमारी और सीमित जिंदगी का एहसास है। इसके बावजूद आनंद जिंदगी को पूरी गर्मजोशी और खुशी के साथ जीता है। वहीं डॉक्टर भास्कर जिंदगी और मौत को बेहद गंभीर नजरिए से देखते हैं। फिल्म को कई पुरस्कार और सम्मान मिले थे।
बावर्ची (1972)
राजेश खन्ना की ‘बावर्ची’ एक हल्की-फुल्की लेकिन गहरी पारिवारिक कहानी है। फिल्म में एक ऐसा परिवार दिखाया गया है, जहां छोटी-छोटी बातों को लेकर अक्सर तनाव और मतभेद बने रहते हैं। फिल्म ने हास्य के जरिए परिवार, आपसी सहयोग और साथ रहने की अहमियत को खूबसूरती से दिखाया।
अभिमान (1973)
‘अभिमान’ में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन ने पति-पत्नी की भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी एक सफल गायक सुबीर और उसकी पत्नी उमा के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म ने शादीशुदा रिश्ते में सफलता, अहंकार, असुरक्षा और बराबरी जैसे मुद्दों को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया है।
मिली (1975)
‘मिली’ में जया बच्चन ने एक खुशमिजाज और जिंदादिल युवती का किरदार निभाया था, जबकि अमिताभ बच्चन भी फिल्म का अहम हिस्सा थे।
मिली अपनी गंभीर बीमारी के बावजूद जिंदगी को सकारात्मक नजरिए से देखती है और आसपास के लोगों के जीवन में खुशियां भरने की कोशिश करती है। फिल्म बीमारी, प्रेम, उम्मीद और जिंदगी को पूरी तरह जीने की भावना को बेहद भावुक लेकिन सहज अंदाज में पेश करती है।
ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में क्यों हैं खास?
ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की खासियत यह थी कि उनकी कहानियां बड़े-बड़े घटनाक्रमों के बजाय आम जिंदगी और मानवीय रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती थीं। यही वजह है कि उनकी फिल्मों में दिखाए गए परिवार, दोस्ती, प्यार और भावनाएं आज भी दर्शकों को जुड़ी हुई महसूस होती हैं।






