Raigarh News: रायगढ़ । साइबर ठगों ने पुलिस, CBI और टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी बनकर एक बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने और गिरफ्तार करने का डर दिखाया। करीब 24 घंटे से अधिक समय तक डिजिटल अरेस्ट का खौफ पैदा कर उनसे पुलिस से सेटिंग कराने के नाम पर 32 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। मामले में जांजगीर-चांपा साइबर थाना पुलिस ने पंजाब पहुंचकर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। मामले में अपराध क्रमांक 649/2025, धारा 318(4), 3(5) बीएनएस एवं 66(D) आईटी एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया था।
पहले टेलीकॉम अधिकारी, फिर CBI अधिकारी बनकर डराया
पुलिस के अनुसार प्रार्थी तुषारकर देवांगन, जांजगीर को पहले एक आरोपी ने टेलीकॉम अथॉरिटी का अधिकारी बनकर फोन किया। उसे बताया गया कि उसका मोबाइल नंबर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में इस्तेमाल हुआ है और कोलाबा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज है।
इसके बाद कथित तौर पर CBI अधिकारी बनकर फोन किया गया और मनी लॉन्ड्रिंग केस में डिजिटल अरेस्ट करने की बात कही गई। अलग-अलग मोबाइल नंबरों से पुलिस, CBI और टेलीकॉम अथॉरिटी के अधिकारी बनकर लगातार फोन किए गए। डर के माहौल का फायदा उठाकर आरोपियों ने पुलिस से सेटिंग कराने के नाम पर 32 लाख रुपये अपने बताए खातों में जमा करा लिए। कुछ दिनों बाद जब सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए, तब पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने परिजनों को घटना की जानकारी दी।
बैंक खाते तक पहुंची साइबर पुलिस
विवेचना के दौरान पुलिस ने उन बैंक खातों की जानकारी जुटाई, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर हुई थी। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम पंजाब पहुंची और शरणप्रीत सिंह उर्फ सन्नी सिंह (27 वर्ष), निवासी ग्राम बल्लोवाल, थाना जोधा, जिला लुधियाना, पंजाब को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की।
पुलिस के अनुसार पूछताछ में आरोपी ने अपने बैंक खाते में रकम प्राप्त होने की बात स्वीकार की। आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, आधार कार्ड, पैन कार्ड और मोबाइल हैंडसेट विधिवत जब्त किए गए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
दो महीने में 17 साइबर ठग गिरफ्तार
जांजगीर-चांपा पुलिस के अनुसार साइबर जागृति अभियान के तहत साइबर थाना लगातार साइबर अपराधों पर कार्रवाई कर रहा है। पुलिस का दावा है कि पिछले दो माह में साइबर ठगी के 17 आरोपियों एवं उनसे जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है।
पुलिस की दो टूक—“डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर डरें नहीं
जांजगीर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कानून की किताब में “डिजिटल अरेस्ट” नाम की कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है और पुलिस किसी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। यदि कोई व्यक्ति मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स सप्लाई या किसी अन्य अपराध का डर दिखाकर खुद को CBI, पुलिस, टेलीकॉम अथॉरिटी, एयरपोर्ट अथवा अन्य विभाग का अधिकारी बताकर पैसे मांगता है, तो उसके झांसे में न आएं। पुलिस के नाम पर डराकर पैसे मांगना साइबर ठगी का तरीका हो सकता है। ऐसे कॉल पर तुरंत सतर्क हों और परिवार/पुलिस को सूचना दें।
कार्रवाई में इनकी रही अहम भूमिका
Raigarh News: इस कार्रवाई में निरीक्षक भास्कर शर्मा, निरीक्षक अशोक वैष्णव, सउनि विवेक सिंह, प्रधान आरक्षक मनोज तिग्गा, हेड कांस्टेबल विवेक सिंह एवं आरक्षक शाहबाज का महत्वपूर्ण योगदान रहा।






