Bhopal Liquor Seizure Controversy: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क-भोपाल के बैरसिया क्षेत्र में तरावली जोड़ मंदिर के पास बड़ी मात्रा में देशी शराब पकड़े जाने के मामले में अब नया विवाद सामने आया है। करीब 17 लाख रुपये कीमत की बताई जा रही शराब की जब्ती के बाद लाइसेंसी फर्म डीआर वाइन ने आबकारी विभाग में आवेदन देकर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
फर्म ने दावा किया है कि जब्त की गई शराब अवैध नहीं थी, बल्कि उसे बाकायदा परमिट के जरिए शराब भंडारगृह से रवाना किया गया था। दूसरी ओर, आबकारी विभाग की कार्रवाई में शराब को अवैध बताते हुए ड्राइवर समेत तीन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
शराब जब्ती के बाद आया नया दावा
भोपाल शराब जब्ती विवाद उस समय सामने आया जब लाइसेंसी फर्म ने आबकारी विभाग को अपना पक्ष देते हुए मामले की जांच की मांग की। फर्म के अनुसार उसके पास पिपलानी और हिरनखेड़ी क्षेत्र की शराब दुकानें हैं।फर्म के ठेकेदार का कहना है कि 24 सितंबर को भोपाल के देशी मदिरा भंडारगृह से परमिट के जरिए 500 पेटी शराब वाहन में लोड कराई गई थी। इसमें 300 पेटी प्लेन और 200 पेटी मसाला शराब बताई गई है।
गलत दुकान पहुंचा शराब से भरा वाहन
भोपाल शराब जब्ती विवाद में फर्म की ओर से दिए गए आवेदन के मुताबिक शराब की खेप पिपलानी की दुकान पर पहुंचनी थी। लेकिन ड्राइवर कथित तौर पर वाहन को गलती से हिरनखेड़ी कंपोजिट दुकान पर ले गया।फर्म का आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने ड्राइवर और सेल्समैन को धमकाया और शराब से भरे वाहन को तरावली की तरफ ले गए। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। पूरे घटनाक्रम की सच्चाई जांच के बाद स्पष्ट होने की बात कही जा रही है।
400 पेटी शराब की हुई थी जब्ती
मामले में आबकारी विभाग की कार्रवाई के दौरान करीब 400 पेटी शराब जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके साथ ही वाहन के ड्राइवर समेत तीन लोगों के खिलाफ आबकारी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया।अब लाइसेंसी फर्म ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि शराब वैध दस्तावेजों के साथ भेजी गई थी। फर्म ने अपने आवेदन में संबंधित परमिट और दूसरे दस्तावेजों का हवाला देते हुए पूरे मामले की दोबारा जांच की मांग की है।
परमिट और ट्रांजिट पास किए जमा
भोपाल शराब जब्ती विवाद में अपना पक्ष मजबूत करने के लिए लाइसेंसी फर्म ने आबकारी विभाग को शराब से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे हैं। इनमें शराब के परमिट के साथ ऑनलाइन ट्रांजिट पास की जानकारी शामिल बताई गई है।फर्म का कहना है कि इन दस्तावेजों से शराब की खेप के वैध तरीके से रवाना होने की जानकारी सामने आ सकती है। अब विभाग इन दस्तावेजों और कार्रवाई के दौरान जुटाए गए रिकॉर्ड की जांच कर रहा है।
CCTV फुटेज से खुलेगा पूरा मामला?
आबकारी विभाग ने मामले से जुड़े दस्तावेजों के साथ CCTV फुटेज भी मांगे हैं। जांच में यह देखा जा सकता है कि शराब से भरा वाहन कहां से रवाना हुआ, किस रास्ते से गया और तरावली तक कैसे पहुंचा।इसके अलावा ड्राइवर और सेल्समैन के साथ कथित तौर पर हुई घटना की भी जांच की जा सकती है। CCTV फुटेज और अन्य रिकॉर्ड से घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल भोपाल शराब जब्ती विवाद में लाइसेंसी फर्म के आरोप और आबकारी विभाग की कार्रवाई, दोनों पहलू जांच के दायरे में हैं। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े दस्तावेज और CCTV फुटेज की जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।ऐसे में जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि जब्त की गई शराब की स्थिति क्या थी, वाहन तरावली तक किन परिस्थितियों में पहुंचा और पूरे घटनाक्रम में किसकी भूमिका रही। फिलहाल मामला जांच के चरण में है।






