बड़वानी। Nishaanebaz.com-Barwani Mandi Cotton Price Protest: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिला मुख्यालय स्थित राजघाट कृषि उपज मंडी में रविवार को कपास की नीलामी के दौरान किसानों का भारी आक्रोश देखने को मिला। दूर-दराज के गांवों से बैलगाड़ियों, चार पहिया वाहनों और मोटरसाइकिलों पर कपास के पोटले लेकर पहुंचे किसानों को जब उपज का भाव 6000 से 7000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच मिला, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित किसानों ने मंडी का मुख्य गेट बंद कर मंडी प्रशासन और स्थानीय व्यापारियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए नीलामी रोक दी।
किसानों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मंडी के व्यापारी आपस में मिलीभगत कर कम बोली लगा रहे हैं और किसानों को लूटा जा रहा है। सुबह से भूखे-प्यासे धूप में खड़े किसानों का कहना था कि इस बार कपास की गुणवत्ता बेहतर होने के बावजूद व्यापारी जानबूझकर कम दाम दे रहे हैं।
किसानों का आरोप: मिलीभगत, खराब व्यवस्थाएं और ठगी का खेल
कुकरा बसाहट से आए किसान हिम्मत ने बताया कि सुबह से लाइन में लगने के बाद भी व्यापारी केवल 6000 रुपये का भाव दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि व्यापारी खरीदी गई अच्छी और खराब कपास को मिक्स कर चालबाजी कर रहे हैं। इसके अलावा मंडी परिसर में छांव और शेड की कोई व्यवस्था नहीं है। यदि अचानक बारिश हो जाए तो किसानों की फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। खाद, बीज, दवा और मजदूरी की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है, जिससे किसान कर्ज के जाल में फंस रहे हैं।
बड़वानी मंडी में कपास के कम भाव पर किसानों का हंगामा। ₹6-7 हजार प्रति क्विंटल बोली पर नाराज किसानों ने गेट बंद कर नीलामी रोकी, प्रशासन की समझाइश पर खरीदी शुरू हुई।#बड़वानी #कपास #किसान #मंडी #Barwani #Cotton #Farmers #Mandi #MadhyaPradesh #Nishaanebaz pic.twitter.com/MfsQly1ddE
— Nishaanebaz.com (@nishaanebaz_com) September 20, 2026
किसान लाखन भावरे ने मंडी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारी चेंबर में बैठकर व्यापारियों के साथ गुप्त बैठकें करते हैं। बाहर के व्यापारियों को मंडी में प्रवेश नहीं दिया जाता, ताकि प्रतिस्पर्धा न बढ़े और स्थानीय व्यापारी सस्ते दामों पर फसल खरीद सकें। किसान 8000 रुपये प्रति क्विंटल की उम्मीद लेकर मंडी आए थे, लेकिन उन्हें भारी निराशा का सामना करना पड़ा।
कानून के तहत कार्रवाई की मांग, किसान संघ ने उठाए कड़े सवाल
राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष अनिल इस्के ने मंडी अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि व्यापारी इशारों-इशारों में मिलीभगत कर कम बोली लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडी अधिनियम 1975 के अनुसार एमएसपी (MSP) से कम बोली लगाने पर धारा 36 और 37 के तहत व्यापारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
अनिल इस्के ने कहा कि पड़ोसी मंडियों में कपास 8000 से 8500 रुपये तक बिक रहा है, जबकि बड़वानी में किसानों को सीधे 1000 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। व्यापारी नमी का बहाना बनाकर सही दाम नहीं दे रहे हैं। इसके अलावा नियम विरुद्ध तरीके से मंडी के बाहर घरों पर भी अवैध खरीद-बिक्री की जा रही है, जिससे हताश होकर किसान औने-पौने दामों पर फसल बेचने को मजबूर हों।
Read More : Sironj House Collapse Heavy Rain: सिरोंज में मूसलाधार बारिश का कहर, ढहा दो मंजिला मिट्टी का मकान
मौके पर पहुंचा प्रशासनिक अमला, समझाइश के बाद शुरू हुई खरीदी
मंडी में गेट बंद और हंगामे की सूचना मिलते ही तहसीलदार राहुल सोलंकी पुलिस और राजस्व अमले के साथ राजघाट मंडी पहुंचे। उन्होंने आंदोलनरत किसानों, किसान संघ के प्रतिनिधियों और व्यापारियों से सीधी बातचीत की।
तहसीलदार राहुल सोलंकी ने बताया कि किसानों की शिकायत सुनने के बाद मंडी प्रशासन को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही किसान प्रतिनिधियों, व्यापारियों और मंडी अधिकारियों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी ताकि आपसी तालमेल से पारदर्शी व्यवस्था बनाई जा सके। प्रशासन के आश्वासन और समझाइश के बाद किसानों ने विरोध खत्म किया और मंडी में कपास की नीलामी दोबारा शुरू कराई जा सकी।







[…] […]