Sunday, September 20, 2026
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Onion Price Hike Crisis: रसोई का बजट बिगाड़ रही प्याज, सालभर में 95 फीसदी तक बढ़ चुके हैं खुदरा दाम

नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Onion Price Hike Crisis: केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों, ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसी विशेष मालगाड़ियों के जरिए शहरों तक आपूर्ति बढ़ाने और सरकारी बफर स्टॉक से भारी रिलीज के बावजूद खुदरा बाजारों में प्याज के दाम कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। देश के कई राज्यों में स्थानीय सब्जी मंडियों, किराना दुकानों और ठेलों पर प्याज अभी भी 60 से 70 रुपये प्रति किलो के ऊंचे भाव पर बिक रही है। लगातार बनी इस तेजी के कारण आम आदमी की रसोई का बजट पूरी तरह से गड़बड़ा गया है।

उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के मध्य में प्याज की ऑल-इंडिया औसत खुदरा कीमत 53.86 रुपये प्रति किलो दर्ज की गई, जो पिछले साल की समान अवधि (27.6 रुपये) की तुलना में करीब 95% अधिक है। वहीं, औसत थोक कीमत भी 45.76 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में दोगुनी से भी ज्यादा है। थोक और खुदरा कीमतों में मौजूद इस बड़े अंतर का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ रहा है।

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कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NCCF) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (Nafed) जैसी नोडल एजेंसियों, केंद्रीय भंडार आउटलेट्स और मोबाइल वैन के जरिए 35 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर बफर स्टॉक से प्याज उपलब्ध करा रही है। अब तक सरकार अपने 1.20 लाख टन के बफर स्टॉक में से 9,200 टन से अधिक प्याज बाजारों में उतार चुकी है, लेकिन बाजार की मांग के मुकाबले यह सप्लाई अभी भी कम पड़ रही है।

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बाजार विशेषज्ञों और रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) के अनुसार, खुदरा बाजार में प्याज की इस तेजी का मुख्य कारण सप्लाई चेन में आया व्यवधान है। भारत में कुल प्याज उत्पादन में रबी (Rabi) की फसल की हिस्सेदारी 60 से 70 प्रतिशत होती है, जिसकी खपत सितंबर-अक्टूबर तक चलती है। हालांकि, इस साल देर से आए मानसून और बेमौसम हुई भारी बारिश के कारण गोदामों में रखी रबी प्याज की गुणवत्ता पूरी तरह खराब हो गई।

खराब स्टॉक बाजार में बेचने योग्य न रहने के कारण पूरा दबाव अब सरकारी बफर स्टॉक पर आ गया है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ (Kharif) की नई फसल की आवक अक्टूबर के अंत या नवंबर की शुरुआत में ही संभव हो पाएगी। तब तक सितंबर और पूरे अक्टूबर महीने में प्याज की कीमतें ऊंची बनी रहने की आशंका है और उपभोक्ताओं को राहत के लिए नवंबर तक का इंतजार करना पड़ सकता है।

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