Sagar Liquor Tragedy: जहरीली शराब केस में निलंबित अधिकारी कीर्ति दुबे बोलीं- ‘मैं अपना काम ठीक से कर रही हूं’

Anuj Nirala

[nishaanebaz.com]  Sagar Liquor Tragedy:सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब पीने से अब तक 10 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। वहीं एक व्यक्ति की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिसे बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया है। घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले में कार्रवाई करते हुए तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इसी बीच निलंबित आबकारी अधिकारी कीर्ति दुबे का बयान सामने आया है।

जवाबदेही को लेकर सवाल पूछे जाने पर कीर्ति दुबे ने कहा कि वह अपना काम ठीक तरीके से कर रही थीं। उन्होंने कहा कि डिप्टी सीएम के साथ होने वाली बैठक में विभाग की ओर से अब तक की गई कार्रवाई और उससे संबंधित डेटा पेश किया जाएगा।

कार्रवाई के आदेश आने के बाद पुष्टि की बात कही

निलंबित किए जाने को लेकर जब कीर्ति दुबे से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि आदेश आने के बाद वह इसकी पुष्टि करेंगी। वहीं जब उनसे मामले में जिम्मेदारी और विभागीय कार्रवाई को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने डिप्टी सीएम के साथ होने वाली बैठक का हवाला दिया।उन्होंने कहा कि बैठक में यह डेटा प्रस्तुत किया जाएगा कि विभाग की ओर से अब तक क्या-क्या कार्रवाई की गई है और किन स्तरों पर काम किया गया।अपने बचाव में उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि “हम अपना काम सही तरीके से कर रहे हैं।”

बोलीं- सभी वृत्त प्रभारी अपना काम कर रहे थे

कीर्ति दुबे ने कहा कि जितने भी वृत्त प्रभारी थे, वे सभी अपना काम कर रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार इस तरह की सूचना विभाग तक नहीं पहुंच पाती है।उन्होंने पुलिस के साथ इनपुट और सूचना को लेकर चर्चा होने की बात भी कही। उनके मुताबिक, पुलिस की ओर से भी यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा था कि इस संबंध में पहले कोई इनपुट उपलब्ध था या नहीं।उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के माध्यम से कोई सूचना विभाग तक पहुंचती है, तो उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की जाएगी। उनका कहना था कि इस मामले में उनके पास पहले कोई शिकवा-शिकायत नहीं आई थी।

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‘कोई आकर कर जाए तो कैसे पता चलेगा’

मामले को लेकर जब उनसे पूछा गया कि आखिर जहरीली शराब जैसी घटना कैसे हुई, तो उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति आकर इस तरह का काम कर जाए तो हर चीज का पहले से पता लगाना मुश्किल होता है।उन्होंने कहा कि विभाग की ओर से जो भी बेहतर किया जा सकता है, वह किया जा रहा है। उनका कहना था कि विभागीय स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे थे।अब उनके बयान के बाद इस बात पर भी नजर है कि सरकार और जांच एजेंसियों की जांच में आबकारी विभाग की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।

10 लोगों की मौत, एक गंभीर मरीज भोपाल रेफर

सागर कलेक्टर प्रतिभा पाल के अनुसार, जहरीली शराब मामले में अब तक 10 लोगों की मौत हुई है। वहीं प्रभावित लोगों में से अन्य मरीजों को उपचार के लिए जिला अस्पताल और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है।एक मरीज की हालत गंभीर बताई गई है, जिसे बेहतर उपचार के लिए भोपाल रेफर किया गया है।

घटना के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों की प्राथमिकता शराब का सेवन करने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।

10-11 गांवों में लगातार की जा रही स्क्रीनिंग

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र के करीब 10 से 11 गांवों में लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं और जरूरत के अनुसार उन्हें उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।प्रशासन का फोकस ऐसे लोगों की पहचान करने पर है, जिन्होंने हाल के दिनों में संदिग्ध शराब का सेवन किया है और उनमें किसी तरह के लक्षण दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस कर रही मामले की जांच

कलेक्टर ने कहा कि जिला पुलिस मामले की लगातार जांच कर रही है। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रशासन और पुलिस दोनों स्तर पर जांच तेज की गई है। वहीं आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और सरकार की ओर से अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है।

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निलंबन के बाद अब जांच रिपोर्ट पर नजर

मामले में तीन आबकारी अधिकारियों के निलंबन के बाद अब जांच की दिशा और रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। एक तरफ प्रशासन प्रभावित गांवों में स्क्रीनिंग और उपचार पर जोर दे रहा है, वहीं पुलिस शराब की सप्लाई और इससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।दूसरी ओर, निलंबित अधिकारी कीर्ति दुबे अपने काम को सही तरीके से किए जाने का दावा कर रही हैं। ऐसे में जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के लिए किस स्तर पर लापरवाही या जिम्मेदारी तय होती है।

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