[nishaanebaz.com] Janjgir Champa Bhojli Festival: जांजगीर-चांपा | छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और पारंपरिक त्योहारों की अपनी अलग पहचान है। इसी संस्कृति की खूबसूरत झलक जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कटघरी में देखने को मिली, जहां भोजली पर्व के अवसर पर धूमधाम से भव्य शोभायात्रा निकाली गई।
शोभायात्रा में गांव के अलग-अलग मोहल्लों से बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। महिलाओं ने सिर पर भोजली लेकर पारंपरिक तरीके से यात्रा में हिस्सा लिया। पूरे गांव में उत्साह और उमंग का माहौल नजर आया।
हर मोहल्ले से शामिल हुए ग्रामीण
कटघरी भोजली शोभायात्रा में गांव के लगभग सभी प्रमुख मोहल्लों की भागीदारी रही।कंवर पारा, रामगढ़-लिम पारा, यादव मोहल्ला, गोंड पारा और गुरु घासीदास मोहल्ला सहित अन्य क्षेत्रों के ग्रामीण शोभायात्रा में शामिल हुए।पारंपरिक गीतों और उत्साह के बीच निकली यात्रा ने पूरे गांव को उत्सव के रंग में रंग दिया।
सिर पर भोजली लेकर निकलीं महिलाएं
कटघरी भोजली तिहार की शोभायात्रा में महिलाओं की खास भूमिका रही।महिलाएं सिर पर भोजली लेकर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ यात्रा में शामिल हुईं। ग्रामीणों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने यह दिखाया कि आज भी गांव के लोग अपनी पुरानी परंपराओं से जुड़े हुए हैं।शोभायात्रा के दौरान गांव में जगह-जगह उत्साह का माहौल बना रहा।
मनका दाई मंदिर पहुंची शोभायात्रा
भोजली शोभायात्रा जांजगीर के दौरान यात्रा गांव के मुख्य तालाब स्थित देवालय मनका दाई पहुंची।यहां पारंपरिक तरीके से कार्यक्रम का समापन किया गया। इसके बाद ग्रामीणों ने रीति-रिवाज के अनुसार भोजली का विसर्जन किया।इस दौरान लोगों ने अच्छी फसल, खुशहाली और परिवारों की सुख-समृद्धि की कामना की।
खेती और हरियाली से जुड़ा है भोजली पर्व
जांजगीर चांपा भोजली पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था से जुड़ा त्योहार नहीं है। इसका संबंध खेती, हरियाली और प्रकृति से भी माना जाता है।
भोजली के लिए मिट्टी और खाद से तैयार पात्र में गेहूं या जवारे के दाने बोए जाते हैं। इसके बाद कई दिनों तक उनकी देखभाल और पूजा की जाती है।भोजली के पौधों का अच्छी तरह बढ़ना अच्छी बारिश और बेहतर फसल की उम्मीद से जोड़ा जाता है।
मितानी की परंपरा है सबसे खास
छत्तीसगढ़ भोजली तिहार की सबसे खास परंपराओं में मितानी का रिश्ता भी शामिल है।भोजली विसर्जन के बाद लोग भोजली की पत्तियों का आपस में आदान-प्रदान करते हैं। इसे दोस्ती और आत्मीयता के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक माना जाता है।इस दौरान एक-दूसरे को ‘सीताराम भोजली’ कहकर अभिवादन करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
भोजली जोड़ती है रिश्तों को
Katghari Bhojli Festival के दौरान निभाई जाने वाली मितानी की परंपरा केवल एक रस्म नहीं है। यह लोगों के बीच प्रेम, दोस्ती और भाईचारे को मजबूत करने का संदेश देती है।गांव में अलग-अलग परिवार और समुदाय इस पर्व में एक साथ शामिल होते हैं। इससे सामाजिक एकता और आपसी मेल-जोल को बढ़ावा मिलता है।
लोकसंस्कृति की खूबसूरत तस्वीर बनी यात्रा
Chhattisgarh Bhojli Festival की यह परंपरा प्रदेश की लोक संस्कृति को जीवित रखने में अहम भूमिका निभाती है।भोजली में खेती, प्रकृति, लोकगीत, आस्था और सामाजिक रिश्ते एक साथ दिखाई देते हैं। यही वजह है कि गांवों में आज भी इस पर्व को उत्साह के साथ मनाया जाता है।
एक साथ नजर आया पूरा गांव
कटघरी में निकली Katghari Bhojli Procession ने पूरे गांव को एक मंच पर ला दिया।हर मोहल्ले के लोगों ने मिलकर पर्व में हिस्सा लिया। महिलाओं, युवाओं और ग्रामीणों की मौजूदगी ने शोभायात्रा को खास बना दिया।यह आयोजन सिर्फ भोजली पर्व का उत्सव नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ की परंपरा, संस्कृति और आपसी भाईचारे की एक सुंदर तस्वीर भी सामने आई।प्रकृति के प्रति सम्मान, अच्छी फसल की उम्मीद और रिश्तों में मिठास का संदेश देने वाला भोजली तिहार कटघरी में पूरे उत्साह के साथ मनाया गया।





