MM Fun City Raipur Verdict: एमएम फन सिटी के वेव पूल में सुरक्षा जाली न होने से टूटा था पैर, उपभोक्ता अदालत ने ठोका 2 लाख से अधिक का जुर्माना

VIKASH KHALKHO

रायपुर। Nishaanebaz.com-MM Fun City Raipur Accident: राजधानी रायपुर स्थित प्रसिद्ध एमएम फन सिटी (MM Fun City) वाटर पार्क के वेव पूल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और हादसे के बाद समुचित प्राथमिक उपचार न मिलने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने पीड़ित उपभोक्ता अनुपम अग्रवाल के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एमएम फन सिटी प्रबंधन और बीमा कंपनी को संयुक्त रूप से हर्जाना देने का सख्त आदेश जारी किया है। उपभोक्ता आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए दोनों पक्षों को 45 दिनों की मोहलत दी है।

पीड़ित को मिलेगा ब्याज समेत मुआवजा

आयोग ने अपने फैसले में निम्नलिखित भुगतानों का स्पष्ट निर्देश दिया है:

  • चिकित्सा खर्च: 2,00,000 रुपये (दो लाख रुपये) का भुगतान, जिस पर 9 जुलाई 2015 से भुगतान की तिथि तक 6% वार्षिक साधारण ब्याज देय होगा।

  • मानसिक क्षतिपूर्ति: पीड़ित को हुई मानसिक प्रताड़ना के एवज में 25,000 रुपये।

  • वाद व्यय (कोर्ट खर्च): कानूनी लड़ाई के खर्च के तौर पर 5,000 रुपये और 5,000 रुपये (कुल 10,000 रुपये) का भुगतान।

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क्या था पूरा मामला?

घटना 25 अप्रैल 2015 की है, जब पीड़ित अनुपम अग्रवाल अपने परिवार और सहकर्मियों के साथ एमएम फन सिटी गए थे। शाम करीब 6 बजे वेव पूल में नहाने के दौरान सुरक्षा जाली न लगी होने के कारण उनका बायां पैर पानी के भीतर बनी नाली में बुरी तरह फंस गया। इससे उनके घुटने के नीचे की टिबिया-फिबुला हड्डी टूट गई।

हादसे के वक्त पार्क परिसर में बुनियादी प्राथमिक उपचार तक की सुविधा मौजूद नहीं थी। साथ आए सहयोगियों ने उन्हें तुरंत श्री कृष्ण हॉस्पिटल और बाद में रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में भर्ती कराया। 26 अप्रैल से 3 मई 2015 तक चले इलाज व ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने उन्हें 3 महीने का बेड रेस्ट और फिजियोथेरेपी की सलाह दी, जिसमें ₹2 लाख से अधिक खर्च हुए।

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बीमा कंपनी व फन सिटी प्रबंधन की दलीलें खारिज

मामले की सुनवाई के दौरान एमएम फन सिटी प्रबंधन ने हादसे की घटना से ही साफ इनकार कर दिया था। वहीं दूसरी ओर, बीमा कंपनी ने तर्क दिया था कि परिवादी उनका सीधा ग्राहक नहीं है और इंश्योरेंस पॉलिसी ‘एमएम वंडर पार्क प्राइवेट लिमिटेड’ के नाम पर पंजीकृत थी।

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आयोग ने दोनों पक्षों के तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि ‘एमएम फन सिटी’ केवल एक ट्रेड नेम है और घटना के समय पब्लिक लायबिलिटी पॉलिसी पूरी तरह वैध थी। प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेजों, डिस्चार्ज समरी और घटनास्थल के रंगीन छायाचित्रों के आधार पर आयोग ने वाटर पार्क की सुरक्षा व्यवस्था में स्पष्ट कमी मानते हुए यह न्यायसंगत निर्णय सुनाया।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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