विशाखापत्तनम। Nishaanebaz.com-Google AI Data Center: टेक क्षेत्र की दिग्गज वैश्विक कंपनी गूगल भारत में अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रही है। इसी कड़ी में कंपनी आंध्र प्रदेश के तटीय शहर विशाखापत्तनम (Vizag) में 1 गीगावाट (1 GW) पावर क्षमता वाला एक विशाल AI डेटा सेंटर हब तैयार कर रही है। गूगल के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का पहला चरण शुरुआती 24 से 30 महीनों में पूरा होने की संभावना जताई जा रही है, जबकि इसके पहले फेज का परिचालन 2028 तक शुरू हो सकता है। कंपनी ने भारत में एआई रूपांतरण को गति देने के लिए 2025 से 2030 के बीच देश में 15 अरब डॉलर का कुल निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।
इस परियोजना के तकनीकी और परिचालन पहलुओं पर बात करते हुए गूगल के एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के ग्लोबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड एनर्जी प्रिंसिपल अलेक्जेंडर स्मिश (Alexander Smith) ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रोजेक्ट में डेटा सेंटर बिल्डिंग्स के साथ-साथ रिन्यूएबल एनर्जी और कनेक्टिविटी जैसे कई इंफ्रास्ट्रक्चर घटकों को एक साथ तैयार करना बेहद अनिवार्य है। कंपनी ने इसी साल अप्रैल महीने में विशाखापत्तनम में 1 GW डेटा सेंटर के निर्माण की नींव रखी थी। पूरे प्रोजेक्ट को पूरी तरह से क्षमता के साथ चालू होने में लगभग 5 साल तक का समय लग सकता है। गूगल का मानना है कि भारत उसके एआई इकोसिस्टम के लिए सबसे तेज़ी से बढ़ता और अत्यधिक क्षमतावान बाजार है।
गूगल का यह विशाखापत्तनम एआई हब न केवल भारत में कंपनी की एआई सेवाओं को सुपरचार्ज करेगा, बल्कि देश के इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को भी वैश्विक स्तर पर एक नई मजबूती प्रदान करेगा। डेटा सेंटर के निर्माण के साथ-साथ गूगल विशाखापत्तनम से नई इंटरनेशनल सब-सी (समुद्री) केबल बिछाने के प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहा है। इस हाई-स्पीड केबल नेटवर्क के जरिए विशाखापत्तनम सीधे ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मध्य पूर्व और यूरोप से जुड़ जाएगा। इससे देश के भीतर डेटा ट्रांसफर की गति में भारी इजाफा होगा और नेटवर्क में आने वाली रुकावट या लेटेंसी (Latency) को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखते हुए इस 1 GW AI डेटा सेंटर हब को पूरी तरह से ग्रीन एनर्जी (सौर और पवन ऊर्जा) की मदद से संचालित करने की योजना बनाई गई है। पारंपरिक डेटा सेंटरों में भारी मात्रा में पानी की खपत होती है, लेकिन गूगल का यह केंद्र एडवांस एयर-कूल्ड टेक्नोलॉजी पर आधारित होगा। इसके चलते इसमें पानी का उपयोग सामान्य कॉरपोरेट ऑफिस जितना ही सीमित रहेगा। कंपनी का लक्ष्य देश के पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना अपनी डिजिटल सेवाओं का विस्तार करना है।





