मोहम्मद याकुब/धरसीवा [Nishanebaaz News]। Sharda Energy Siltara Cyber Security Seminar के अंतर्गत आमजन, औद्योगिक कर्मियों और उनके परिवारों को डिजिटल दुनिया के खतरों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से सिलतरा स्थित शारडा एनर्जी एंड पावर लिमिटेड में एक विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।
यह कार्यक्रम रायपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक श्रीमती स्वेता श्रीवास्तव सिन्हा के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) अभिषेक झा और उप पुलिस अधीक्षक (माना) लम्बोदर पटेल के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इसमें सिलतरा थाना प्रभारी राजेन्द्र सिंह कँवर और पुलिस स्टाफ की मुख्य भूमिका रही।
कंपनी के अधिकारियों सहित 180 लोग हुए शामिल
कार्यक्रम में कंपनी के यूनिट हेड मनोज शाह, अमित मिश्रा और विवेक चौधरी सहित अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। सेमिनार में लगभग 75 से 80 कर्मचारियों ने ऑफलाइन माध्यम से और करीब 100 लोगों ने ऑनलाइन जुड़कर साइबर सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हासिल कीं।
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बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और अभिभावकों की जिम्मेदारी पर जोर
थाना प्रभारी सिलतरा राजेन्द्र सिंह कँवर ने वर्तमान समय में बच्चों और किशोरों के सामने आ रही डिजिटल चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी इंटरनेट के दौर में पैदा हुई है, जबकि 40-55 वर्ष की पीढ़ी ने टीवी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तक के तकनीकी बदलाव को देखा है।
उन्होंने अभिभावकों को सलाह देते हुए कहा:
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दोस्त बनकर संवाद करें: बच्चों को केवल मोबाइल से दूर रखना समाधान नहीं है। उनसे मित्रवत बातचीत करें और उनकी ऑनलाइन दुनिया को समझें।
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सेक्स्टॉर्शन और ब्लैकमेलिंग से सावधान: साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर बच्चों की गतिविधियों और रुचियों का अध्ययन कर उनसे संपर्क साधते हैं और बाद में निजी तस्वीरों या चैटिंग के जरिए ब्लैकमेल करते हैं।
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सहानुभूतिपूर्ण रवैया अपनाएं: यदि बच्चा किसी ऑनलाइन जाल या ब्लैकमेलिंग का शिकार हो जाता है, तो उसे डांटने या डराने के बजाय उसका समर्थन करें, ताकि वह अपनी बात बेझिझक साझा कर सके।
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AI, डीपफेक और सोशल मीडिया ट्रोलिंग से रहें सतर्क
थाना प्रभारी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक (Deepfake) तकनीक के दुरुपयोग पर आगाह किया। उन्होंने बताया कि किसी भी व्यक्ति की फोटो, आवाज या वीडियो का इस्तेमाल कर फर्जी और आपत्तिजनक सामग्री बनाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर एक बार अपलोड की गई सामग्री कभी पूरी तरह नष्ट नहीं होती, इसलिए युवाओं को अपनी निजी तस्वीरें, पासवर्ड या वीडियो किसी से साझा नहीं करने चाहिए। साथ ही, सोशल मीडिया पर मिलने वाले Like, Comment और ट्रोलिंग से प्रभावित न होकर अपने वास्तविक व्यक्तित्व पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी।
‘डिजिटल अरेस्ट’ के भ्रम से बचें, 1930 पर करें तुरंत शिकायत
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित प्रश्नोत्तरी (Q&A) सत्र में उपस्थित लोगों की शंकाओं का समाधान किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी या पुलिस प्रक्रिया नहीं होती है, यह साइबर ठगों द्वारा डराने का एक तरीका मात्र है।
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जरूरी सावधानियां: किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, पासवर्ड या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। संदिग्ध लिंक और अनजान वीडियो कॉल से दूर रहें।
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हेल्पलाइन नंबर: साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत 1930 साइबर हेल्पलाइन पर कॉल करें अथवा www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।





