Dongargarh Janpad Audit Hospitality Controversy: डोंगरगढ़ जनपद का विवादित आदेश: CAG ऑडिट टीम की ‘खातिरदारी’ के निर्देश पर खड़े हुए सवाल

VIKASH KHALKHO

डोंगरगढ़ [Nishanebaaz News]। Dongargarh Janpad Audit Hospitality Controversy के तहत राजनांदगांव जिले की जनपद पंचायत डोंगरगढ़ का एक नया आदेश प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा का विषय बन गया है। महालेखाकार (लेखापरीक्षा) की टीम 25 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक जनपद पंचायत क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों के खातों और अभिलेखों की जांच करने आ रही है।

इस ऑडिट के संबंध में डोंगरगढ़ जनपद पंचायत ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों और ग्राम पंचायतों को एक लिखित निर्देश जारी किया है। आदेश में साफ तौर पर कहा गया है कि ऑडिट टीम के ग्राम पंचायतों में भ्रमण के दौरान उनके ठहरने, विश्राम, भोजन और चाय-नाश्ते की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। अब इसी ‘खातिरदारी’ के फरमान पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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जांच एजेंसी का ही आतिथ्य: निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल

सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत महालेखाकार office द्वारा पंचायतों के वित्तीय अभिलेखों की निष्पक्ष जांच करना एक अनिवार्य कार्य है। हालांकि, विवाद इस बात को लेकर है कि जिन ग्राम पंचायतों के खातों में वित्तीय गड़बड़ी या सही इस्तेमाल की जांच होनी है, क्या उन्हीं पंचायतों के संसाधनों से ऑडिट टीम का खान-पान और विश्राम कराया जा सकता है?

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की आचार संहिता और गाइडलाइंस में ऑडिटर्स की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर अत्यधिक बल दिया गया है। नियमों के मुताबिक ऑडिट अधिकारियों को किसी भी ऐसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आतिथ्य को स्वीकार करने से बचना होता है, जिससे उनकी जांच की निष्पक्षता प्रभावित हो या उस पर सवाल खड़े हों।

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खर्च किस सरकारी मद से होगा? आदेश में कोई स्पष्टता नहीं

जनपद पंचायत द्वारा 24 अगस्त को जारी आदेश में महालेखाकार कार्यालय के 17 अगस्त के मूल पत्र का संदर्भ दिया गया है। लेकिन डोंगरगढ़ जनपद के इस आदेश में यह बिल्कुल साफ नहीं किया गया है कि ऑडिट टीम के भोजन, चाय-नाश्ते और ठहरने का खर्च कौन सा विभाग या कौन सी मद वहन करेगी:

  • जनपद का अपना बजट: क्या जनपद पंचायत अपने स्वयं के प्रशासनिक बजट से इस खर्च की भरपाई करेगी?
  • ग्राम पंचायतों का फंड: क्या ग्राम पंचायतों पर यह दबाव रहेगा कि वे अपने सरकारी खातों से ऑडिटरों के भोजन और ठहरने का बिल भुगताने करें?
  • वित्तीय नियम की अनदेखी: यदि ग्राम पंचायतें इस राशि का भुगतान करती हैं, तो इसके लिए किस नियम या वित्तीय स्वीकृति का उपयोग किया जाएगा, इसका आदेश में कोई उल्लेख नहीं है।

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महालेखाकार कार्यालय के मूल पत्र और जनपद के आदेश की जांच की मांग

पूरे मामले में सबसे बड़ा रहस्य यह है कि महालेखाकार कार्यालय के मूल 17 अगस्त वाले पत्र में वास्तव में क्या निर्देश दिए गए थे। अगर मूल पत्र में केवल ऑडिट और निरीक्षण के प्रबंध की बात थी, तो डोंगरगढ़ जनपद पंचायत ने अपनी ओर से ‘भोजन, चाय और नाश्ते’ की व्यवस्था का बिंदु किस नियम के तहत जोड़ा?

हालांकि, केवल इस आदेश के आधार पर किसी सीधे वित्तीय भ्रष्टाचार का दावा नहीं किया जा सकता, क्योंकि आदेश में यह नहीं लिखा है कि पंचायतों को अपने खाते से पैसे देने हैं। लेकिन पारदर्शिता की मांग यह है कि जनपद पंचायत और महालेखाकार कार्यालय स्थिति स्पष्ट करें। अब देखना यह होगा कि इस विवाद के सामने आने के बाद प्रशासन इस आदेश पर क्या स्पष्टीकरण जारी करता है और ऑडिट टीम के खर्च के लिए किस बजट मद का खुलासा होता है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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