[Nishaanebaz News] Rewa News: रीवा। लगातार हुई भारी बारिश भले ही अब थम गई हो, लेकिन रीवा और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ का संकट अभी भी बरकरार है। नदियों और जलाशयों का जलस्तर कम नहीं होने के कारण कई रिहायशी इलाके अब भी जलमग्न हैं। बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए SDRF का रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन की मांग पर भोपाल से NDRF और सीधी से विशेष रेस्क्यू दल रीवा और मऊगंज जिले में भेजे गए हैं। रेस्क्यू टीमों ने एक ही दिन में एक हजार से अधिक बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई की है।
बारिश बंद, लेकिन बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए लगातार आ रहे कॉल
रीवा में बारिश थमने के बाद भी नदियों का जलस्तर कई इलाकों में चिंता का कारण बना हुआ है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई निचले इलाके पानी में डूब गए हैं। SDRF के कमांड सेंटर पर लगातार बाढ़ में फंसे लोगों और उनके परिजनों की मदद के लिए फोन कॉल पहुंच रहे हैं।इन कॉल के आधार पर रेस्क्यू टीमों को अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जा रहा है। टीम मौके पर पहुंचकर बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद उन्हें शेल्टर होम और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचा रही है।
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भोपाल और सीधी से पहुंची विशेष रेस्क्यू टीमें
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने अतिरिक्त सहायता की मांग की थी। इसके बाद भोपाल और सीधी से विशेष रेस्क्यू दस्ते भेजे गए हैं।रेस्क्यू टीमों को जैसे ही किसी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र की सूचना मिलती है, वे तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर देती हैं। टीमों का विशेष ध्यान बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और गंभीर रूप से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित निकालने पर है।
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एक दिन में हजार से अधिक लोगों का रेस्क्यू
लगातार चल रहे राहत और बचाव अभियान के दौरान टीमों ने एक दिन में एक हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी भरे होने के कारण कई परिवार अपने घरों में फंसे हुए थे।रेस्क्यू दल ऐसे परिवारों तक पहुंचकर उन्हें बाहर निकाल रहा है। सुरक्षित निकाले गए लोगों को जरूरत के अनुसार राहत शिविरों और शेल्टर होम में पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
पदमधर कॉलोनी के लोगों ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर, शहर के वार्ड क्रमांक 5 स्थित पदमधर कॉलोनी में बाढ़ की चपेट में आए लोगों ने स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।पीड़ितों का कहना है कि बिहार नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने के बाद इलाके में हालात तेजी से बिगड़ गए। पानी घरों तक पहुंचने लगा तो लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर पहले जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा।
बच्चों और बुजुर्गों के साथ छत पर गुजारी रात
स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ के दौरान स्थिति इतनी भयावह हो गई थी कि कई परिवारों को बच्चों और बुजुर्गों के साथ घरों की छतों पर शरण लेनी पड़ी। लोगों ने पन्नी और अन्य अस्थायी साधनों का सहारा लेकर रात गुजारी।
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पीड़ित परिवारों का आरोप है कि पानी कम होने के बावजूद कई परिवारों तक अभी तक पर्याप्त मदद नहीं पहुंची है। उनका कहना है कि बाढ़ के बाद इलाके में बिजली, पीने के पानी और राशन जैसी बुनियादी सुविधाओं का संकट बना हुआ है।
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न बिजली, न पीने का पानी और न बचा राशन
बाढ़ प्रभावित लोगों ने बताया कि पानी भरने से घरों में रखा जरूरी सामान खराब हो गया। कई परिवारों के पास न तो पीने का पर्याप्त पानी बचा है और न ही कच्चा राशन।स्थानीय लोगों का आरोप है कि संकट की इस स्थिति में उन्हें अपेक्षित सहायता नहीं मिली। पीड़ितों ने वार्ड पार्षद, नगर निगम और जिला प्रशासन की राहत व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए जल्द राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।
रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, प्रशासन के सामने राहत पहुंचाने की चुनौती
रीवा और आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी है। हालांकि बारिश रुकने के बाद भी जलस्तर और जलभराव के कारण कई क्षेत्रों में हालात सामान्य नहीं हो सके हैं।एक ओर SDRF, NDRF और विशेष रेस्क्यू टीमें लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर प्रभावित इलाकों में बिजली, पेयजल, भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।





