[Nishaanebaz News] MP News: गंज बासौदा/विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले की त्योंदा तहसील के ग्राम कस्बा बांगरोद स्थित शासन संधारित श्री राधा-कृष्ण मंदिर को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। मंदिर के पूर्व पुजारी पंडित लक्ष्मीनारायण दुबे ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) के सदस्य प्रियंक कानूनगो पर कथित तौर पर धमकी देने और अपशब्द कहने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पूर्व पुजारी ने वीडियो के साथ कुछ दस्तावेज और अन्य वीडियो भी सोशल मीडिया पर साझा किए हैं।हालांकि, वीडियो और दस्तावेजों में किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले में आरोपों को लेकर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
पूर्व पुजारी ने वीडियो जारी कर लगाए आरोप
लक्ष्मीनारायण दुबे का कहना है कि उनका परिवार लंबे समय से शासन संधारित श्री राधा-कृष्ण मंदिर में पीढ़ियों से पूजा-अर्चना करता रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते उन्हें पुजारी पद से हटाया गया।सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उन्होंने दावा किया कि मंदिर के ताले और चाबी को लेकर हुए विवाद के दौरान उन्हें कथित तौर पर धमकी दी गई और अपशब्द कहे गए। पूर्व पुजारी ने वीडियो के जरिए दावा किया कि उनके पास इस संबंध में रिकॉर्डिंग मौजूद है।
मंदिर की जमीन पर अतिक्रमण का भी आरोप
पूर्व पुजारी लक्ष्मीनारायण दुबे ने मंदिर से जुड़ी जमीन को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि मंदिर की जमीन की नपती कराई गई थी, जिसमें कथित अतिक्रमण सामने आया था।उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ दस्तावेज और वीडियो साझा करते हुए मंदिर, शासकीय बावड़ी, बाग और अन्य जमीनों पर कथित अतिक्रमण के आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की प्रशासनिक या स्वतंत्र जांच से पुष्टि होना बाकी है।पूर्व पुजारी का कहना है कि मंदिर और उससे जुड़ी संपत्तियों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और इसी कारण उन्हें तथा उनके परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किए जाने का आरोप है।
अगस्त 2025 में मंदिर पर ताला लगाने का उठा था मामला
पूर्व पुजारी के अनुसार, अगस्त 2025 में भी मंदिर पर ताला लगाए जाने का मामला सामने आया था। इस संबंध में उन्होंने 11 अगस्त 2025 को एसडीएम बासौदा को आवेदन देकर शिकायत किए जाने का दावा किया था। उनका कहना है कि शिकायत के बाद मंदिर के ताले खोले गए थे।उन्होंने अब अपनी और परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है तथा समाज के लोगों से सहयोग और मामले में न्याय की मांग की है।
12 मई को प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में हुआ था विवाद
मंदिर विवाद का मामला इससे पहले भी चर्चा में आ चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के भाई मयंक कानूनगो द्वारा मंदिर में ताला लगाए जाने की शिकायत के बाद 12 मई को प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची थी।इस दौरान मंदिर की मूर्तियों को हटाने की कथित कोशिश को लेकर विवाद की स्थिति बनी थी। इसके बाद प्रशासन द्वारा मंदिर के तत्कालीन पुजारी लक्ष्मीनारायण दुबे को हटाकर आगामी आदेश तक नई व्यवस्था किए जाने की बात सामने आई थी।
10 जून को पुजारियों ने सौंपा था 36 पेज का ज्ञापन
मामले को लेकर 10 जून को पुजारियों और अन्य लोगों द्वारा गंज बासौदा में प्रदर्शन करते हुए प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जाने की बात भी सामने आई थी। ज्ञापन में श्री राधा-कृष्ण मंदिर से हटाए गए पुजारी लक्ष्मीनारायण दुबे की पुनर्नियुक्ति की मांग की गई थी।ज्ञापन में मंदिर और अन्य शासकीय संपत्तियों से जुड़ी जमीन पर कथित अतिक्रमण के आरोप भी लगाए गए थे। शिकायतकर्ताओं ने मामले की जांच और कार्रवाई की मांग की थी।
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पत्रकारों को नोटिस भेजे जाने का मामला भी आया था सामने
मंदिर विवाद से जुड़ी खबरों के प्रकाशन के बाद पत्रकारों को नोटिस भेजे जाने को लेकर भी मामला चर्चा में आया था। आरोप लगाया गया था कि समाचार प्रकाशित होने के बाद कुछ पत्रकारों और अन्य लोगों को विदिशा पुलिस द्वारा नोटिस भेजकर बयान के लिए बुलाया गया।इसके विरोध में पत्रकार संगठनों ने ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की थी और प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए थे।
अब वायरल वीडियो के बाद फिर गरमाया मामला
पूर्व पुजारी द्वारा नया वीडियो और दस्तावेज सोशल मीडिया पर जारी किए जाने के बाद राधा-कृष्ण मंदिर विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। वीडियो में लगाए गए आरोपों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।अब इस पूरे मामले में प्रशासनिक जांच, संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया और वायरल वीडियो की प्रामाणिकता महत्वपूर्ण होगी। आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।





