Raksha Bandhan 2026: निशानेबाज न्यूज़ डेस्क- रक्षाबंधन का त्योहार इस साल 28 अगस्त को मनाया जाएगा। भाई-बहन के इस खास त्योहार को लेकर लोगों के मन में एक सवाल बना हुआ है कि क्या इस दिन चंद्र ग्रहण का असर पड़ेगा। रक्षाबंधन चंद्र ग्रहण को लेकर सामने आई जानकारी के मुताबिक इस बार सबसे जरूरी बात यह है कि ग्रहण भारत में दिखाई देगा या नहीं।ग्रहण दिखाई देने की स्थिति में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा और राखी बांधने के समय में बदलाव हो सकता है। वहीं अगर ग्रहण भारत में दिखाई ही नहीं देता, तो यहां रहने वाले लोगों के लिए सूतक से जुड़े नियम लागू नहीं माने जाते। यही वजह है कि रक्षाबंधन चंद्र ग्रहण को लेकर सही जानकारी जानना जरूरी है।
इस बार की सबसे बड़ी राहत यह है कि दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ऐसे में भारत में रहने वाले लोगों के लिए सूतक काल मान्य नहीं होगा। रक्षाबंधन चंद्र ग्रहण के कारण सामान्य पूजा और राखी बांधने की परंपरा रोकने की जरूरत नहीं होगी।यानी भारत में बहनें अपनी सामान्य परंपरा के अनुसार भाई को राखी बांध सकती हैं। पूजा-पाठ भी सामान्य तरीके से किया जा सकता है। हालांकि अलग-अलग स्थानों पर स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए परिवार अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग को भी देख सकता है।
ग्रहण दिखाई देता तो क्या बदल जाते नियम?
धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को विशेष समय माना गया है। अगर कोई ग्रहण किसी स्थान पर दिखाई देता है, तो वहां उसके शुरू होने से पहले सूतक काल माना जाता है। रक्षाबंधन चंद्र ग्रहण की स्थिति में भी ऐसी मान्यता के अनुसार राखी बांधने का समय प्रभावित हो सकता है।सूतक शुरू होने के बाद कई धार्मिक परंपराओं में पूजा-पाठ और शुभ काम रोक दिए जाते हैं। मंदिरों के कपाट भी बंद किए जाते हैं। ऐसे में राखी बांधने की रस्म सूतक शुरू होने से पहले पूरी करने की परंपरा बताई जाती है।
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सूतक काल में किन बातों का रखा जाता है ध्यान?
सूतक काल को लेकर धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में थोड़ी अलग हो सकती हैं। आम तौर पर इस दौरान भगवान का ध्यान और मंत्र जाप करने की बात कही जाती है। रक्षाबंधन चंद्र ग्रहण के दौरान भी कई लोग इन्हीं मान्यताओं के अनुसार नियमों का पालन करते हैं।यदि ग्रहण दिखाई दे और सूतक मान्य हो, तो इस दौरान मंदिर में पूजा या देवी-देवताओं की मूर्ति को छूने से बचने की परंपरा है। ग्रहण खत्म होने के बाद स्नान और घर-मंदिर की सफाई करने के बाद पूजा करने की मान्यता है।
ग्रहण के बाद कैसे होती है शुद्धि?
धार्मिक मान्यता के अनुसार दिखाई देने वाले ग्रहण के खत्म होने के बाद घर और पूजा स्थान की सफाई की जाती है। कई परिवार गंगाजल का छिड़काव करते हैं और देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। रक्षाबंधन चंद्र ग्रहण की स्थिति में ग्रहण दिखाई देता तो इन परंपराओं के बाद ही राखी बांधने की बात कही जाती।लेकिन इस बार भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने की जानकारी के कारण यहां ऐसी प्रक्रिया जरूरी नहीं मानी जा रही है। इसलिए लोगों को बेवजह चिंता करने की जरूरत नहीं है।
राखी बांधने से पहले सबसे जरूरी बात
रक्षाबंधन भाई-बहन के रिश्ते का त्योहार है और इस दिन बहन भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती है। रक्षाबंधन चंद्र ग्रहण को लेकर अगर आपके मन में भी संशय है, तो सबसे पहले यह देखें कि ग्रहण आपके क्षेत्र में दिखाई दे रहा है या नहीं।दिए गए विवरण के अनुसार भारत में इस बार चंद्र ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां सूतक काल का प्रभाव नहीं माना जाएगा और रक्षाबंधन की पूजा तथा राखी बांधने की रस्म सामान्य तरीके से की जा सकती है। स्थानीय पंचांग में बताए गए शुभ समय को ध्यान में रखकर त्योहार मनाना बेहतर रहेगा।





