MP News: खंडवा में वन विभाग की प्रमोशन लिस्ट पर बवाल, 7 दिन में ही रद्द हुआ आदेश

Rahul Goshwami

Khandwa Forest Department Promotion Controversy: खंडवा वन विभाग पदोन्नति विवाद मध्यप्रदेश के वन विभाग में चर्चा का विषय बन गया है। खंडवा स्थित मुख्य वन संरक्षक (CCF) कार्यालय में निमाड़ क्षेत्र के चार जिलों से बड़ी संख्या में वन कर्मचारी पहुंचे और हाल ही में जारी पदोन्नति सूची पर आपत्ति जताई। कर्मचारियों का आरोप है कि पहले जारी सूची में शामिल 96 पात्र वनकर्मियों के नाम बाद में हटाकर अन्य कर्मचारियों को शामिल कर लिया गया।

खंडवा वन विभाग पदोन्नति विवाद को लेकर वनकर्मियों का कहना है कि नई पदोन्नति सूची में वरिष्ठता सूची का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कई वरिष्ठ और पात्र कर्मचारियों को पीछे कर दिया गया, जबकि उनके बाद नियुक्त हुए कुछ कर्मचारियों को सूची में ऊपर स्थान दे दिया गया।कर्मचारियों के विरोध के बाद विभाग ने इस आदेश को फिलहाल निरस्त कर दिया है और पूरे मामले की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है।

वन कर्मचारी संघ ने उठाई आपत्ति
खंडवा वन विभाग पदोन्नति विवाद पर वन कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष अमित मिश्रा ने कहा कि पहले भी जारी पदोन्नति सूची को निरस्त किया गया था। नई सूची में भी वरिष्ठता और पात्रता के नियमों का सही पालन नहीं होने का आरोप है।उन्होंने कहा कि करीब 96 वनरक्षक और वनपाल इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। संघ की मांग है कि जब तक पूरे मामले का समाधान नहीं हो जाता, तब तक कर्मचारियों की भारमुक्ति और स्टार सेरेमनी जैसी प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

CCF ने बताया लिपिकीय त्रुटि का मामला
खंडवा वन विभाग पदोन्नति विवाद पर मुख्य वन संरक्षक (CCF) बासु कनौजिया ने कहा कि कुछ आदेशों को संशोधन के लिए वापस लिया गया है। कर्मचारियों द्वारा दिए गए आवेदन को स्वीकार कर पुनर्विचार की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।उन्होंने बताया कि पदोन्नति सूची तैयार करते समय कुछ लिपिकीय त्रुटियां हो गई थीं। इसी कारण कुछ पात्र कर्मचारी नीचे चले गए और कुछ अन्य कर्मचारियों के नाम ऊपर आ गए। विभाग अब नियमों के अनुसार सूची में सुधार कर रहा है।
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करीब 100 कर्मचारियों पर पड़ा असर
खंडवा वन विभाग पदोन्नति विवाद में विभाग के अनुसार करीब 100 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि संशोधित सूची तैयार होने के बाद पात्र कर्मचारियों को नियमों के अनुसार पदोन्नति दी जाएगी और भविष्य में रिक्त पदों के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।फिलहाल विभाग ने पूरे मामले की समीक्षा शुरू कर दी है। अब कर्मचारियों और अधिकारियों की नजर संशोधित पदोन्नति सूची पर टिकी हुई है, जिससे विवाद का अंतिम समाधान निकल सके।

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