Privacy Nightmare: प्राइवेसी के लिए बड़ा खतरा! बिना LED लाइट जले हर कुछ सेकंड में चुपके से फोटो और ऑडियो रिकॉर्ड करेगा मेटा का नया चश्मा

VIKASH KHALKHO

Privacy Nightmare: सिलिकॉन वैली/टेक डेस्क: दिग्गज टेक कंपनी मेटा (Meta) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में एक ऐसा क्रांतिकारी लेकिन विवादित कदम उठाने जा रही है, जो इंसानी जिंदगी को पूरी तरह बदल सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मेटा एक बेहद एडवांस एआई-पावर्ड स्मार्टग्लासेस पर काम कर रही है, जो यूजर की हर छोटी-बड़ी एक्टिविटी को खुद-ब-खुद रिकॉर्ड करेगा। आप पूरे दिन में क्या देख रहे हैं, किससे क्या बात कर रहे हैं, और किस रास्ते से गुजर रहे हैं—यह स्मार्ट चश्मा सब कुछ न सिर्फ रिकॉर्ड करेगा, बल्कि उसे याद भी रखेगा।

यह चश्मा आपके पर्सनल डिजिटल असिस्टेंट की तरह काम करेगा। उदाहरण के लिए, अगर आप शाम को चश्मे से पूछेंगे कि “आज दिनभर में मैंने क्या-क्या किया?” या “मेरी कार की चाबी कहां छूटी है?”, तो यह सेकंडों में आपको पूरी जानकारी दे देगा। लेकिन तकनीक की यह सहूलियत प्राइवेसी (Privacy) के लिहाज से किसी बुरे सपने से कम नहीं मानी जा रही है।

कैसे काम करेगा ‘सुपर सेंसिंग’ फीचर?

मेटा के मौजूदा स्मार्टग्लासेस में एआई फीचर्स को एक्टिवेट करने के लिए यूजर को कमांड देनी पड़ती है, लेकिन नए प्रोटोटाइप में इसे पूरी तरह बदल दिया गया है:

  • ऑलवेज ऑन (Always On) मोड: इस नए फीचर को इंटरनली ‘सुपर सेंसिंग’ (Super Sensing) नाम दिया गया है। इसके तहत चश्मे को हर बार इनेबल करने की जरूरत नहीं होगी।

  • निरंतर डेटा कलेक्शन: चश्मा लगातार अपने विजुअल लेंस और इन-बिल्ट माइक्रोफोन के जरिए आसपास की ऑडियो-विजुअल (दृश्य और श्रव्य) जानकारी कलेक्ट करता रहेगा।

  • बेहतर AI कॉन्टैक्स्ट: यह सारा डेटा मेटा एआई (Meta AI) के इंजन को भेजा जाएगा ताकि एआई के पास यूजर के परिवेश और आदतों को समझने के लिए ज्यादा से ज्यादा संदर्भ (Context) मौजूद रहे।

हर कुछ सेकंड में कैप्चर होगी फोटो, परमानेंट स्टोरेज पर मेटा की सफाई

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्रोटोटाइप ग्लास को इस तरह प्रोग्राम किया गया है कि यह हर कुछ सेकंड के अंतराल पर ऑटोमैटिकली तस्वीरें खींचेगा और बैकग्राउंड की आवाजें रिकॉर्ड करता रहेगा।

मेटा का दावा: प्राइवेसी के विवाद से बचने के लिए टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि मेटा इस रिकॉर्डेड रॉ ऑडियो और वीडियो डेटा को अपने सर्वर पर हमेशा के लिए स्टोर (Permanent Store) नहीं करेगी। कंपनी केवल इस डेटा का ‘मेटाडेटा’ (मुख्य सूचनाओं का निचोड़) निकालेगी और उसे ही सर्वर पर अपलोड करेगी, जिससे प्राइवेसी का जोखिम कम हो सके और एआई आसानी से जवाब दे सके।

LED लाइट रहेगी बंद; बिना सहमति सर्विलांस का गहराया खतरा

भले ही मेटा डेटा को स्टोर न करने की बात कह रही हो, लेकिन प्राइवेसी एक्सपर्ट्स ने इस तकनीक को लेकर रेड फ्लैग (चेतावनी) जारी कर दिया है:

  • सहमति (Consent) का उल्लंघन: सबसे बड़ा विवाद इसके काम करने के तरीके को लेकर है। इस ‘सुपर सेंसिंग’ फीचर को फोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग मोड न मानकर एक एआई फंक्शन माना जा रहा है।

  • खतरनाक बदलाव: इसके चलते रिकॉर्डिंग के दौरान चश्मे में दी गई LED इंडिकेटर लाइट बंद रहेगी (आमतौर पर जब स्मार्ट ग्लास से वीडियो बनता है, तो सामने वाले को सचेत करने के लिए लाइट जलती है)।

  • चोरी-छिपे जासूसी का डर: इंडिकेटर लाइट बंद रहने से आपके सामने खड़े व्यक्ति को कभी पता ही नहीं चल पाएगा कि उसकी बातचीत और चेहरा किसी के चश्मे द्वारा रिकॉर्ड किया जा रहा है। फेशियल रिकग्निशन और डेटा लीक के इतिहास को देखते हुए मेटा के इस कदम की चौतरफा आलोचना शुरू हो गई है।

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विकास कुमार खलखो एक डिजिटल पत्रकार, समाचार संपादक और SEO कंटेंट क्रिएटर हैं, जिन्हें पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में एक दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने BJMC, Master of Journalism (MJ) और M.Phil. (मीडिया स्टडीज़) की डिग्री हासिल की है और दबंग दुनिया, हमर छत्तीसगढ़ योजना, हरिभूमि, सन स्टार डेली न्यूज़ और छत्तीसगढ़ की आवाज़ जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों के साथ काम किया है। उन्हें हिंदी पत्रकारिता, ब्रेकिंग न्यूज़ कवरेज, SEO-फ्रेंडली कंटेंट राइटिंग, डिजिटल पब्लिशिंग, कंटेंट स्ट्रैटेजी, थंबनेल डिज़ाइन और सोशल मीडिया मैनेजमेंट में विशेष महारत हासिल है। उनका उद्देश्य सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय पत्रकारिता के माध्यम से पाठकों तक प्रभावशाली समाचार पहुँचाना और साथ ही उच्च गुणवत्ता वाला डिजिटल कंटेंट तैयार करना है।
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