Wednesday, September 30, 2026
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Sonu Sood In Bhilai: भिलाई से खास जुड़ाव: सोनू सूद ने कहा—’मेहनती लोगों का शहर है भिलाई, समाज सेवा के लिए हूँ तैयार’

Sonu Sood In Bhilai: भिलाई। बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता और प्रख्यात समाजसेवी सोनू सूद एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने स्टील सिटी भिलाई पहुंचे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा करते हुए देश और राज्य के कई सुलगते समसामयिक मुद्दों पर अपनी बेबाक और कूटनीतिक राय साझा की। भिलाई शहर से अपने पुराने और आत्मीय जुड़ाव का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए सोनू सूद ने कहा कि भिलाई मूलतः बेहद मेहनती, कर्मठ और कमाल के प्रगतिशील लोगों का शहर है। यहाँ के नागरिकों में जीवन में आगे बढ़ने का एक अद्भुत जज्बा दिखाई देता है। उन्होंने आह्वान किया कि शहर के विकास और सामाजिक उत्थान के लिए सभी को एकजुट होकर सकारात्मक दिशा में काम करना चाहिए और अच्छे सामाजिक कार्यों के लिए लोग सीधे उनसे जुड़ सकते हैं।

धर्मांतरण और यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर जताया नजरिया

देश में चल रहे ज्वलंत मुद्दों जैसे यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सोनू सूद ने कहा कि एक गतिशील राष्ट्र में लोगों की सोच और विचारधारा समय-समय पर बदलती रहती है। कई बार लोग परिस्थितियों के वश में आकर अपने मूल रास्ते से भटक जरूर जाते हैं, लेकिन अंततः वे सही और सकारात्मक दिशा में वापस लौट आते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे स्वयं को किसी एक भौगोलिक क्षेत्र या राज्य की सीमाओं में बांधकर नहीं देखते; चाहे बात उनके गृह राज्य पंजाब की हो या छत्तीसगढ़ के भिलाई की, उनका एकमात्र अंतिम उद्देश्य लोगों की जिंदगियों को बदलना है।

वहीं, जबरन या प्रलोभन देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण के गंभीर मुद्दे पर अभिनेता ने दोटूक शब्दों में कहा:

“किसी भी विशेष समुदाय या वर्ग को जानबूझकर निशाना बनाकर उसका धर्म परिवर्तन कराना कतई उचित नहीं है। मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि कोई भी व्यक्ति जिस धर्म या संस्कृति में जन्म लेता है, उसे उसी धर्म में पूरी गरिमा और सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करने का अधिकार मिलना चाहिए।”

मुख्यधारा में लौट रहे बस्तर के युवाओं को मिले सही मार्गदर्शन

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल और वहां व्याप्त नक्सलवाद की समस्या पर बात करते हुए सोनू सूद के भीतर का संवेदनशील समाजसेवी मुखर हो उठा। उन्होंने कहा कि बस्तर के जनजातीय युवाओं और वहां के स्थानीय कलाकारों में कूट-कूट कर प्रतिभा भरी हुई है। उन्होंने शासन और समाज से पुरजोर वकालत की कि जिन भटके हुए युवाओं ने हिंसा का रास्ता छोड़कर, आत्मसमर्पण (Surrender) कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है, उन्हें समाज द्वारा सहर्ष स्वीकार किया जाना चाहिए। ऐसे युवाओं को एक बेहतर और नई शुरुआत के लिए पर्याप्त रोजगार के अवसर और सही मार्गदर्शन मिलना अनिवार्य है, तभी देश का समग्र विकास संभव हो सकेगा।

NEET परीक्षा और छात्रों के मानसिक तनाव पर माता-पिता को नसीहत

देशभर में चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (NEET) के दौर में छात्रों द्वारा किए जा रहे आत्मघाती कदमों पर सोनू सूद ने गहरी प्रशासनिक और मानवीय चिंता व्यक्त की। उन्होंने अभिभावकों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि बच्चों पर माता-पिता की अत्यधिक और अवास्तविक उम्मीदों का बोझ कई बार ऐसी दुखद घटनाओं की मुख्य वजह बनता है। उन्होंने कड़े शब्दों में संदेश दिया कि दुनिया की कोई भी प्रतियोगी परीक्षा या डिग्री किसी भी बच्चे की अनमोल जान से बढ़कर नहीं हो सकती। बच्चों को उनकी आंतरिक क्षमता और रुचि के अनुसार ही करियर चुनने और आगे बढ़ने की पूरी आजादी दी जानी चाहिए, ताकि वे मानसिक तनाव से मुक्त रहकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे सकें।

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