Slaughterhouse Controversy: भोपाल: रासुका के बाद भी आरोपी को जमानत पर भड़के गौ सेवक, नगर निगम पर मिलीभगत के आरोप

Slaughterhouse Controversy: भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का बहुचर्चित नगर निगम स्लॉटर हाउस (बूचड़खाना) गौ मांस कांड एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस विवादित स्लॉटर हाउस को दोबारा शुरू करने की प्रशासनिक कवायदों के बीच जमीनी स्तर पर तनाव काफी बढ़ गया है। इस पूरे मामले के मुख्य आरोपी असलम चमड़ा ने माननीय हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर स्लॉटर हाउस के संचालन का अधिकार वापस मांगा है। आरोपी की इस कानूनी पहल के बाद प्रशासन में हलचल तेज हो गई है, जिसका हिंदू संगठनों द्वारा पुरजोर विरोध किया जा रहा है।

हाई कोर्ट के निर्देश के बाद नगर निगम प्रशासन की सक्रियता

प्राप्त जानकारी के अनुसार, माननीय हाई कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के सख्त निर्देशों और शर्तों के अधीन भोपाल नगर निगम को इस स्लॉटर हाउस के मामले में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने निगमायुक्त को इस विषय पर 15 दिन के भीतर फैसला करने को कहा है। कोर्ट के इसी रुख को आधार बनाकर नगर निगम प्रशासन ने संचालन संबंधी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने और इस पर कानूनी अभिमत (लीगल ओपिनियन) लेने के लिए आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। प्रशासन की इस त्वरित सक्रियता से हिंदू समाज में भारी नाराजगी है।

‘जय भवानी हिंदू संगठन’ ने मुख्य द्वार पर चस्पा की आपत्ति

नगर निगम द्वारा की जा रही इस बैकडोर तैयारी की भनक लगते ही, पूर्व में इस पूरे गौ मांस कांड का पर्दाफाश करने वाले ‘जय भवानी हिंदू संगठन’ ने दोबारा मोर्चा खोल दिया है। संगठन के कार्यकर्ताओं ने तत्काल विवादित स्लॉटर हाउस के मुख्य द्वार पर जाकर अपनी लिखित आपत्ति चस्पा (पेस्ट) कर दी है। इसके साथ ही संगठन ने इस संवेदनशील विषय को लेकर नगर निगम प्रशासन और हाई कोर्ट में भी अपनी औपचारिक लिखित आपत्ति दर्ज कराई है, ताकि किसी भी स्थिति में आरोपी को राहत न मिल सके।

रासुका की कार्रवाई के बाद भी आरोपी को मिली जमानत

जय भवानी हिंदू संगठन के प्रमुख भानु हिंदू ने इस पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन और नगर निगम को आड़े हाथों लेते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में पहले दिन से ही शहर सरकार और प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। शुरुआत में एफआईआर (FIR) दर्ज करने में देरी की गई, सबूतों को मिटाया गया और आरोपियों को बचाने के लिए केस को जानबूझकर कमजोर किया गया। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसी बड़ी कार्रवाई होने के बावजूद दोषियों को इतनी जल्दी जमानत मिल गई।

उग्र आंदोलन और आत्मदाह की दी गई बड़ी चेतावनी

संगठन के प्रमुख ने आरोप लगाया कि आरोपी असलम चमड़ा उर्फ असलम कुरैशी ने स्लॉटर हाउस का संचालन दोबारा हथियाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। जिसने सैकड़ों की संख्या में गौ माता का मांस मुंबई और विदेशों तक में सप्लाई किया, उसे किसी भी कीमत पर दोबारा संचालन की कमान नहीं मिलनी चाहिए। संगठन ने नगर निगम प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस सैटेलाइट स्लॉटर हाउस का अधिकार दोबारा असलम चमड़ा को मिला, तो भोपाल में एक उग्र आंदोलन किया जाएगा। भानु हिंदू ने कहा कि इस स्थिति में गौ सेवक स्लॉटर हाउस में स्वयं को कटवाने के लिए तैयार हैं, लेकिन गौ हत्यारों को यह जगह वापस नहीं लेने देंगे।

गौ हत्या मामले का पूरा घटनाक्रम

17 दिसंबर 2025: पुलिस मुख्यालय के पास हिंदू संगठन ने एक संदिग्ध ट्रक को रोका, जिससे 26 टन कथित गौमांस बरामद किया गया।

18 दिसंबर 2025: जब्त किए गए मांस के नमूनों को विस्तृत जांच के लिए मथुरा स्थित लैब में भेजा गया।

07 जनवरी 2026: ट्रक से बरामद मांस की जांच रिपोर्ट आई, जिसमें गोमांस होने की आधिकारिक पुष्टि हुई।

09 जनवरी 2026: गोमांस की पुष्टि होते ही विवादित स्लॉटर हाउस को प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया।

12 जनवरी 2026: जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य संचालक असलम चमड़ा और ट्रक ड्राइवर को पुलिस ने गिरफ्तार किया।

19 जनवरी 2026: इस पूरे गोकशी मामले की गहराई से जांच के लिए शासन स्तर पर एक एसआईटी (SIT) का गठन हुआ।

अप्रैल 2026: मुख्य आरोपी असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को उच्च न्यायालय से जमानत मिल गई।

जून 2026: हाई कोर्ट ने भोपाल निगमायुक्त को इस स्लॉटर हाउस के संचालन पर 15 दिन में अंतिम निर्णय लेने के निर्देश दिए।

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