Wednesday, September 9, 2026
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Mahakal Mandir Ujjain: महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं पर संतों ने उठाए सवाल, गर्भगृह प्रवेश पर रोक को लेकर जताई नाराजगी

Mahakal Mandir Ujjain: उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में राष्ट्रीय महाकाल सेना का 17वां स्थापना दिवस शनिवार को बेहद धूमधाम और संगठनात्मक विमर्श के साथ मनाया गया। इस ऐतिहासिक स्थापना दिवस समारोह में हिस्सा लेने के लिए देश के कोने-कोने और विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में साधु-संत, अखाड़ों के प्रतिनिधि और संगठन के शीर्ष पदाधिकारी उज्जैन पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान जहाँ एक ओर संगठन के देशव्यापी विस्तार और आगामी धार्मिक रणनीतियों पर गहन मंथन हुआ, वहीं दूसरी ओर देश के सुप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा महाकाल मंदिर की वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्थाओं और संतों के गर्भगृह प्रवेश पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर संतों ने खुले मंच से तीखे सवाल उठाए। संत समाज ने प्रशासन से पारंपरिक और सनातन धार्मिक व्यवस्थाओं को तुरंत बहाल करने की पुरजोर मांग की है।

स्थापना दिवस के मुख्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महाकाल सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत योगी रोहतास नाथ महाराज ने संगठन के गौरवमयी इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में स्थापित हुई राष्ट्रीय महाकाल सेना आज देश के 30 राज्यों में पूरी सक्रियता के साथ सनातन धर्म के संरक्षण का कार्य कर रही है। यह देश के सभी प्रमुख अखाड़ों के पूज्य संतों द्वारा संचालित एक पूर्णतः स्वतंत्र और निष्पक्ष धार्मिक संगठन है। उन्होंने बताया कि कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से लेकर पूर्वोत्तर के सुदूर राज्यों तक के हजारों समर्पित कार्यकर्ता इस समारोह का साक्षी बनने पवित्र नगरी उज्जैन पहुंचे हैं। स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में उज्जैन में एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसके बाद मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के तट पर महाआरती, सुमधुर भजन संध्या और संगठनात्मक बैठकों का आयोजन संपन्न हुआ।

समारोह के दौरान मुख्य मुद्दा महाकाल मंदिर में संतों के प्रवेश को लेकर गर्माया रहा। महंत योगी रोहतास नाथ महाराज ने मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि वर्तमान में पूज्य साधु-संतों को केवल नंदी हॉल से ही दर्शन कराए जा रहे हैं और गर्भगृह में जाने से रोका जा रहा है, जो कि सर्वथा अनुचित है। उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में संतों को गर्भगृह तक जाकर पूजा-अर्चना करने की सुगम अनुमति थी। उन्होंने स्थानीय जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंध समिति से मांग की कि वे संत समाज के साथ प्रोटोकॉल के तहत सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करें और इस संवेदनशील विषय पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लें।

वहीं, राष्ट्रीय महाकाल सेना के राष्ट्रीय सचिव अष्ट कौशल महंत राहुलगिरी महाराज ने सांगठनिक एजेंडा सामने रखते हुए कहा कि आने वाले समय में संगठन का दायरा मध्य प्रदेश के साथ-साथ देश के अन्य राज्यों के ग्रामीण अंचलों तक फैलाया जाएगा। उन्होंने भी मंदिर व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार की वकालत करते हुए कहा कि पारंपरिक धार्मिक व्यवस्थाओं का संरक्षण सर्वोपरि होना चाहिए। उत्तराखंड से विशेष रूप से पधारे संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी मणिगिरी महाराज ने दो टूक शब्दों में कहा कि देश के जितने भी प्रमुख और पौराणिक मंदिर हैं, वहां आम श्रद्धालुओं के साथ-साथ संतों की धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का अक्षुण्ण सम्मान होना चाहिए। उन्होंने एलान किया कि संगठन इस मुद्दे को बहुत जल्द प्रशासनिक और शासकीय स्तर पर मजबूती से उठाएगा और संत समाज के हक की आवाज बुलंद करता रहेगा। स्थापना दिवस के अंतिम सत्र में राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय कार्यकारिणी की एक बंद कमरे में विशेष बैठक भी हुई, जिसमें आगामी धार्मिक प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा तैयार की गई।

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