Noorjahan Mango: आलीराजपुर। भारत को आमों का देश कहा जाता है। इस पहचान को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मध्यप्रदेश एक प्रमुख राज्य बनकर उभरा है। प्रदेश की अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और खास भौगोलिक परिस्थितियां आम उत्पादन के लिए बेहद उत्तम मानी जाती हैं। यही कारण है कि यहाँ दशहरी, लंगड़ा, चौसा और अल्फांसो जैसी कई प्रसिद्ध किस्मों के साथ एक बेहद अनोखी किस्म भी पैदा होती है। इस किस्म ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यह खास किस्म “नूरजहाँ” आम है, जिसे फलों की दुनिया में “किंग ऑफ मैंगो” भी कहा जाता है।
दुनिया का सबसे भारी आम
मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पैदा होने वाला यह आम अपने विशाल आकार के लिए प्रसिद्ध है। इसे दुनिया के सबसे बड़े आमों में गिना जाता है। सामान्यतः एक नूरजहाँ आम का वजन लगभग 2 से 5 किलोग्राम तक होता है। इसका आकार इतना बड़ा होता है कि एक ही आम पूरे परिवार के लिए काफी माना जाता है। इसका रंग, अनूठी सुगंध और बेहतरीन मिठास लोगों को पहली नजर में ही आकर्षित कर लेती है। यही कारण है कि बड़े शहरों और विदेशों के बाजारों में इसकी भारी मांग है। बाजार में इसके एक फल की कीमत 1500 से 3000 रुपये तक होती है।
पेड़ों पर आते हैं सीमित फल
नूरजहाँ आम केवल अपने विशाल आकार के कारण ही नहीं, बल्कि अपनी दुर्लभता के कारण भी बहुत खास माना जाता है। इसके पेड़ों पर फलों की संख्या काफी सीमित होती है। यही वजह है कि इसकी कीमत सामान्य आमों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। कई बार तो इसका एक ही फल हजारों रुपये में बिक जाता है। इसके चलते यह आम अब स्थानीय किसानों के लिए एक बेहद लाभकारी फसल के रूप में उभर रहा है। कट्ठीवाड़ा का खास मौसम और वातावरण इस किस्म की विशेष गुणवत्ता को बनाए रखने में मदद करता है।
अफगानिस्तान से जुड़ा है इतिहास
माना जाता है कि नूरजहाँ आम की यह प्रजाति वर्षों पहले अफगान क्षेत्र से भारत पहुंची थी। इसके बाद साल 1950 और 60 के दशक में यह मध्यप्रदेश के मालवा और आदिवासी अंचल झाबुआ-आलीराजपुर में विकसित हुई। आलीराजपुर जिले के ग्राम जूना कट्टीवाड़ा स्थित शिव आम फार्म के किसान श्री भरतराजसिंह जादव ने बताया कि उनके पिता स्व. रणवीरसिंह जादव लगभग 60 वर्ष पहले गुजरात से इसका पौधा लाए थे। उन्होंने अपने खेत में इसे लगाया और वर्षों की मेहनत से संरक्षित किया। उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी उम्र अभी 20 से 25 वर्ष है। इसके अलावा अब 11 नए पौधे भी तैयार हो रहे हैं।
विदेशों में “लक्ज़री मैंगो” की पहचान
कट्टीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहाँ आम की ख्याति बहुत पुरानी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए साल 1999 और 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है। वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में इस प्रीमियम आम की भारी मांग रहती है। इसके अलावा अमेरिका, कनाडा और यूके में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी यह आम काफी लोकप्रिय है। हालांकि इसका उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका बड़े पैमाने पर निर्यात नहीं हो पाता है। इसके बावजूद इसकी दुर्लभता इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” का दर्जा दिला रही है।









