Pelma Coal Mine: गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। जिले के तमनार ब्लॉक में “जल, जंगल और जमीन” को बचाने के लिए आदिवासियों का बड़ा गुस्सा फूट पड़ा है। पेल्मा ओपनकास्ट कोल खदान परियोजना के लिए होने वाली पर्यावरणीय जनसुनवाई से ठीक एक दिन पहले ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट के सामने जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों ने कथित तौर पर कंपनी द्वारा बांटे गए कंबल, स्टील की पेटियां, छाते और स्पोर्ट्स किट को कलेक्टर कार्यालय के सामने सड़क पर फेंक दिया। महिलाओं के भारी विरोध और प्रदर्शन के आगे आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप प्रशासन ने प्रस्तावित जनसुनवाई को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया है।
जमीन के बदले प्रलोभन देने का आरोप
यह पूरा मामला तमनार तहसील के ग्राम पेल्मा, उरबा और लालपुर का है। इन गांवों की कीमती जमीन पेल्मा ओपनकास्ट कोल खदान के लिए ली जानी है। इसी सिलसिले में प्रशासन ने जनसुनवाई तय की थी। लेकिन ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि उनकी बेशकीमती जमीन हड़पने और जनसुनवाई में समर्थन जुटाने के लिए कंपनी ने गांवों में सामान बांटकर प्रलोभन का खेल शुरू किया था। इसी बात से नाराज होकर आदिवासी महिलाएं और युवा हाथों में वह सामान लेकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गए। युवाओं ने अडानी फाउंडेशन छपी हुई क्रिकेट जर्सी दिखाते हुए इसे गुमराह करने की साजिश करार दिया।
मुआवजे और नौकरी के लिए अल्टीमेटम
प्रभावित गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर के नाम एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने अपनी दो टूक मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। उनकी पहली मांग है कि जब तक सभी प्रभावित गांवों के लिए मुआवजे का समान मूल्य तय नहीं होता, तब तक कोई जनसुनवाई मान्य नहीं होगी। इसके साथ ही पुनर्वास नीति के तहत दो एकड़ जमीन के बदले परिवार के एक सदस्य को स्थायी सरकारी नौकरी दी जाए। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी थी कि बिना लिखित समझौते के जबरन सुनवाई करने पर कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है।
आक्रोश के आगे झुका प्रशासन
सड़कों पर बैठी महिलाओं के उग्र प्रदर्शन और ग्रामीणों के इस भारी विरोध को देखते हुए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने एक आपातकालीन आदेश जारी किया। इस सरकारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी रायगढ़ के अनुरोध पर ग्राम पेल्मा में होने वाली लोक सुनवाई को आगामी आदेश तक स्थगित कर दिया गया है। ग्रामीणों ने इस स्थगन को अपनी पहली बड़ी जीत बताया है। हालांकि, उनका कहना है कि अपनी जमीनों को पूरी तरह बचाने के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।









