Saturday, October 3, 2026
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Political Leader Harassment FIR: खैरागढ़ में सियासी भूचाल; महिला अधिकारी के शोषण मामले में फंसे जनपद सभापति, अग्रिम जमानत याचिका खारिज

खैरागढ़ (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में इस वक्त एक बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामला गरमाया हुआ है। भाजपा से जुड़े जनपद सभापति सुधीर गोलछा पर एक महिला प्रशासनिक अधिकारी द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद जिले की राजनीति में भूचाल आ गया है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, जिसके बाद से ही आरोपी नेता फरार चल रहा है। इस बीच आरोपी को कानून से भी कोई राहत नहीं मिली है और छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Rejected HighCourt) को सिरे से खारिज कर दिया है।

अकेले में मिलने का दबाव और पूर्व CEO जैसा अंजाम भुगतने की धमकी (Political Leader Harassment FIR) महिला अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, आरोपी सुधीर गोलछा लंबे समय से उन्हें मानसिक और प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। आरोपी अक्सर चर्चा के बहाने उनके दफ्तर पहुंच जाता था और अन्य कर्मचारियों को बाहर भेजकर अकेले में बात करने का दबाव बनाता था। बात न मानने पर आरोपी ने महिला अधिकारी को धमकी भरे लहजे में कहा, “पूर्व CEO का हाल देख लिया है न?” इस धमकी के बाद महिला अधिकारी गहरे तनाव और डर के साए में जीने को मजबूर हो गईं। आरोपी लगातार मोबाइल पर कॉल कर अभद्र टिप्पणियां करता था और जब पीड़िता ने उसका नंबर ब्लॉक किया, तो उसने वरिष्ठ अधिकारियों से झूठी शिकायतें कर उन्हें परेशान करना शुरू कर दिया।

छुईखदान थाने में बीएनएस (BNS) के तहत मामला दर्ज (BNS Harassment Sections Imposed) काफी समय तक लोकलाज और बदनामी के डर से मानसिक प्रताड़ना सहने के बाद, आखिरकार महिला अधिकारी ने हौसला दिखाया और छुईखदान थाना पहुंचकर आरोपी के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75(1), 78 और 79 के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत किया है। एफआईआर दर्ज होते ही आरोपी जनपद सभापति अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए जिले से फरार हो गया।

विपक्ष हमलावर, नारी सुरक्षा के दावों पर उठे सवाल (Government Officer Safety Row) सुधीर गोलछा की अग्रिम जमानत याचिका हाई कोर्ट से खारिज होने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई और तेज हो गई है। पुलिस की विशेष टीमें Absconding Politician Police Hunt के तहत आरोपी की धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। दूसरी तरफ, इस संवेदनशील मामले ने तूल पकड़ लिया है और सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों में “महिला सम्मान” Merr “बेटी बचाओ” जैसे नारों पर तीखे सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि जब जिले की एक क्लास-वन महिला अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें रसूखदारों के आगे घुटने टेकने पर मजबूर किया जा रहा है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का दावा कितना खोखला है। यह मामला अब छत्तीसगढ़ का एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन चुका है।

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